HindiBhashi: हिन्दी में SEO और Digital Marketing की पूरी जानकारी

Blogging, SEO, Digital Marketing aur Social Media se related sampurn jankari hindi me jise sikhkar aap Online Work from home se Paise kamaa sakte hai

Krishna

Saturday, October 17, 2020

3 बहाने जो असफल बनाती है

3 बहाने जो हमें सफल नहीं होने देती (3 Common causes that make people unsuccessful) 

इस बात  को परिभाषित करना बहुत ही कठिन है कि सफल कौन है और असफल कौन? यानि सफलता कि परिभाषा क्या है और कौन सफल है? आपको शायद पता हो जिन्हें हम और आप असफल मानते है, उनमें से बहुत से ऐसे लोग हैं जो अपने आप को असफल नहीं मानते। फिर भी बहुत से ऐसे भी लोग हैं जो अपनी असफलता को स्वीकार करते हैं। 

बहाने जो असफल बनाती है

जिसने अपनी असफलता को स्वीकार कर लिया निश्चित रूप से फिर वो इसके कारणो को ढूँढता है। चार दोस्त है, कोई ज्यादा सफल हो जाता है, कोई थोड़ा, उनमे से कोई ऐसा भी है जो असफल हो जाता है। आखिर कोई तो कारण होगा? 

बहुत से कारण हो सकते हैं असफलता के। जरूरी नहीं सारे कारण किसी एक व्यक्ति के साथ हो। असफल होने के लिए कोई एक कारण ही काफी होता है। उस कारणों को बताएगा कौन और स्वीकार कौन करता है? जी हाँ सही कहा मैंने। किसी कि असफलता के पीछे बहुत सारे कारण हो सकते हैं। उनमें से सबसे प्रमुख कारण है:

असफलता को स्वीकार न करना 

जैसे मोटापा कई बीमारियों की जड़ है वैसे ही अपनी असफलता को स्वीकार न करना किसी व्यक्ति के असफल होने के लिए काफी है। जब आप स्वीकार करेंगे आप बीमार हैं तभी तो डॉक्टर के पास जाएँगे। जब स्वीकार ही नहीं करेंगे फिर डॉक्टर के पास क्यों जाना। 

आज से तीस साल पहले मेरी एक व्यक्ति से बात हुई। मै उस समय पढ़ाई ही कर रहा था। मैंने उस व्यक्ति को पूछा "आप क्या करते हैं?" 

उनका जबाव था "शिक्षक हूँ"।

मैंने पूछा " कहाँ ?"

उन्होने एक संस्कृत स्कूल का नाम बताया। मैं उस स्कूल के बारे में जानता था। वो स्कूल वर्षो पहले बना था। न ही सरकार से मान्यता प्राप्त थी और न ही स्कूल में एक भी बच्चे पढ़ते थे। चुकी स्कूल को बने हुए काफी वर्ष बीत  चुके थे, परिणाम स्वरूप उस स्कूल के बहुत से शिक्षक जिन्हें अपने बच्चों को पालने  कि चिंता थी और वास्तविकता को स्वीकार करते थे दिल्ली - मुंबई जैसे शहरों में जाकर नौकरी कर रहे थे और आज भी कर रहे हैं।  आज के समय में अब उस स्कूल का अवशेष भी शेष न रहा। 

लिहाजा मैंने उस व्यक्ति से कहा "फिर तो आप बेरोजगार हैं क्योकि कोई सैलरी तो आपको मिलती नहीं और न ही स्कूल में कोई काम है? 


मेरा उनको बेरोजगार कहना बहुत ही नागबार गुजरा था। मेरे ऊपर वो क्रोधित हो गए थे और मेरे प्रश्न को अज्ञानता समझकर मेरे से बात करने से मना कर दिया था। वो व्यक्ति आज भी अपने पिता के छोड़े हुये संपति का उपभोग करते हुए जीवन-यापन कर रहे हैं। 

यहाँ उस व्यक्ति के बारे में यह कहना गलत होगा कि इनके पास कोई बहाना है या इनको असफल कहना भी शायद गलत होगा। क्योंकि यहाँ कोई लक्ष्य ही नहीं है। जब लक्ष्य न हो फिर achievement कैसा? यहाँ मैंने इस व्यक्ति कि चर्चा इसलिए की है क्योंकि स्वयं के दृष्टिकोण से भले ही वो व्यक्ति सफल हो लेकिन सामाजिक दृष्टि से जरूर असफल हैं। 

मेरे साथ पढ़ने वाला मेरा भी एक मित्र पढ़ाई के बाद गाँव मे ही रह गया। शुरुआती कुछ दिनों तक पिताजी के पेंशन पर जीवन-यापन करता रहा बाद में अपने पुरखों कि संपति बेचकर गुजारा कर रहा है। समय - समय पर सरकार से मिलने वाले अनुदान का फायदा उठाता रहता है। इसके अलावा कोई टोपी घुमाकर कुछ कमा ले कह नहीं सकते। अपनी ज़िंदगी से खुश है। कोई गिला- शिकवा नहीं। इसको भी शायद असफल कहना गलत होगा, क्योंकि कोई लक्ष्य नहीं है। 

दिक्कत वहाँ होती है जब आप कोई लक्ष्य तो निर्धारित करते हैं, लेकिन उस लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाते। लक्ष्य तक न पहुँच पाना कोई अनहोनी नहीं है। ऐसा बहुतों के साथ होता है। आप लक्ष्य तक नहीं पहुच सके इस बात को स्वीकार करना बड़ी बात है। जहाँ बहुत से लोग स्वीकार करने से पीछे हट जाते हैं।

ज्यादातर लोग जो अपने लक्ष्य को पाने में असफल होते है वो ये नहीं चाहते कि लोग ये समझे कि मैं असफल हूँ। भले ही वो ये स्वीकार भी कर ले कि वो असफल हो गया तो वो ये स्वीकार नहीं करता कि इसमें उसकी कोई गलती थी। इसके लिए वो तरह-तरह की परिस्थितियों को दोष देता है। 

एक लक्ष्य को पाने में असफल होना ज़िंदगी में असफल होना नहीं है। जिसने अपनी गलतियों को स्वीकार किया वो फिर दूसरे तरीके से एक अलग लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ते हैं। चुकी पहले के गलतियों को स्वीकार किया इसलिए दुबारा उस गलती को नहीं करेगा और निश्चित रूप से सफलता कि संभावना बढ़ जाती है। 

अपनी गलती स्वीकार नहीं करेंगे, सौ काम कर लो हाथ वही आएगा।     

मै एकबार ज़ी न्यूज के मालिक सुभाष चंद्रा को सुन रहा था। उनको किसी ने पूछा "आप किसी काम में असफल हुए हैं।"

उनका जबाव था "मैंने जितने काम शुरू किये उससे ज्यादा बंद किये"

तात्पर्य शुरुआती चरण में गलतियाँ करना आम बात है, बड़ी बात है उसको स्वीकार करना। आज शुभाष चन्द्रा कि गिनती देश के जाने-माने उद्योगपतियों  में होती है।

मैं भी स्वीकार करता हूँ कि मैं अपने जीवन के पहले चरण में असफल हो गया। चुकी अपनी गलतियों को स्वीकार किया इसलिए आज आंशिक सफल हूँ।  

परिस्थिति मेरे अनुकूल नहीं हैं। 

परिस्थिति एक बहुत बड़ा factor है किसी कि सफलता और असफलता के पीछे। परिस्थिति अनुकूल और प्रतिकूल होने के पीछे कई factors हो सकते है। जैसे:

  • आर्थिक स्थिति 
  • पारिवारिक पृष्टभूमि 
  • व्यक्तिगत हुनर 
  • इच्छाशक्ति, 

इसके अलावा भी कई कारण हो सकते है  जो परिस्थिति को अनुकूल या प्रतिकूल बनाते है।


इसमें कोई दो राय नहीं कि परिस्थिति अनुकूल हो तो सफलता पाने में आसानी होती है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि प्रतिकूल को अनुकूल न बनाया जा सके। 

आपने वो फिल्म देखी है ? "Dashrath Manjhi  The Mountain Man" पहाड़ पर रहने वाला एक गरीब आदमी कैसे अपने दृढ़ इच्छा शक्ति के बलपर, अकेले वर्षो कि मेहनत से पहाड़ से रास्ता बना देता है। उसने किसी परिस्थिति को नहीं कोसा न ही किसी से किसी तरह कि साहायता कि आशा की। अपने दृढ़ इच्छाशक्ति के बलपर एक असंभव काम को संभव कर दिया। 

उस फिल्म का एक संवाद मुझे बहुत पसंद है (हम क्यों भगवान के भरोसे बैठें, क्या पता भगवान हमारे भरोसे बैठा हो"।   

किसी ने सच ही तो कहा है (कौन कहता है आसमान में छेद नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तवियत से उछालो  यारों"। 

स्वादिष्ट खाने का मजा तभी मिलता है जब ज़ोरों की भूख लगी हो। वैसे ही सफलता का मजा तभी है जब प्रतिकूल परिस्थिति में रहकर सफलता पायी जाए। सबकुछ अनुकूल हो फिर वो सफलता नहीं विरासत में मिली हुई संपति है।  विरासत को संभाल कर  रखना भी सबके लिए संभव नहीं होता । उसके लिए भी हुनर चाहिये। 

हर काम में कमी निकालना 

रजनीश ने अपने एक प्रवचन में कहा था "दुनिया में सबसे आसान काम है किसी को गलत या सही साबित करना।"  इसके लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। अगर किसी चीज़ को गलत साबित करना है तो उसकी दस कमियाँ निकाल दो, अगर सही साबित करना है तो दस फायदे गिना  दो।

इसको सही से समझने के लिए टेलीविज़न पर चलने वाले political debate को देख सकते है। 

कुछ लोगों में आदत होती है हर काम मे कमी निकालना। इसमें कोई दो राय नहीं की किसी काम को करने से पहले उसमें आनेवाले risk factors को देखा जाता है। दिक्कत तब आती है जब केवल risk factors ही नजर आये। एक वक्त ऐसा भी आता है जब ऐसे लोग काम में कमी निकालते -निकालते निकम्मों की श्रेणी में आ जाते हैं।

ये सबकुछ निर्भर करता है आपके देखने के नज़रिए पर। इसको हम एक- आध उदाहरण से समझ सकते है: 

half filled glass

 अब इस गिलास के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे? आधा खाली है या आधा भरा है। बात छोटी सी है। आपका जो भी जबाव होगा वो आपके सोच को दर्शाता है। 

नदी में इसलिए नहीं उतरते की कहीं डूबकर मौत न हो जाए। लेकिन घर के अंदर बैठे-बैठे heart attack से मौत हो जाए उसका क्या करेंगे?

ब्लॉगिंग शुरू करना चाहते है मगर कैसे: फ्री में ब्लॉग बनाएँ "step by step guide"  

उपसंहार 

जाने-माने motivator शिव खेड़ा ने अपने किताब "जीत आपकी" में एक जगह लिखा है "सफल लोग कोई अलग काम नहीं करते, वो अलग तरीके से काम करते हैं।" 

अगर कोई लक्ष्य न हो फिर तो सब बहाने चलेंगे , लेकिन  अगर  कोई लक्ष्य पाल रखा है फिर........... 

याद है  हमारे भूतपूर्व राष्ट्रपति  डॉ. अब्दुल कलाम का वो विचार  "अगर सूरज की तरह चमकना है तो सूरज की तरह जलना  पड़ेगा"। 

Sunday, October 11, 2020

Hindustaan ke teen sabse bade motivator

हिंदुस्तान के तीन सबसे बड़े motivator जिन्होंने  इतिहास की दिशा बदल दी। 

आजकल युवाओं में motivator को सुनने और पढ़ने का चलन जोड़ो पर है। यही कारण है कि motivator बनना भी आजकल एक career के समान हो गया है। आजकल के motivator प्रेरणादायक बातें जितनी करते है उससे ज्यादा चुट्कुले सुनाते हैं। यही कारण है कि लोग जाते तो हैं motivator के पास अपनी समस्या लेकर, लेकिन समस्या खत्म होने के बजाय वो एक और समस्या में फस जाते है। 

और वो नयी समस्या है सबकुछ छोडकर हरवक्त motivator को सुनते रहना या motivational article पढ़ते रहना। इसका कारण होता है ऐसे लोगों के contents रोचक कहानियाँ और चुट्कुले से भरे होते है। 

उनको तो आपके रूप में एक reader या viewer मिल गया, लेकिन आपको क्या मिला? आप पहले भी निठल्ले थे अभी भी वैसे ही है। 

आज के समय में सैकड़ों लोग motivator बनकर अपना दुकान चला रहे हैं। दूसरों का भला भले न हुआ हो लेकिन उनका भला जरूर होता है। 

लेकिन क्या आपको पता है इस धरती पर कुछ ऐसे भी motivator हुये जिन्होने इतिहास को ही बदल दिया। अगर ये न हुये होते तो शायद रामायण और महाभारत न लिखी जाती। भारतीय इतिहास में आज हम जो कुछ पढ़ रहे है शायद और कुछ पढ़ने को मिलता। 

आप सोच रहे होंगे मैं किनकी बात कर रहा हूँ। मैं बात कर रहा हूँ जामबंत, भगवान कृष्ण और भारतीय इतिहास के सबसे बड़े कूटनीतिज्ञ चाणक्य के बारे में। 

इनके मोटिवेशन में सबसे बड़ी बात ये थी कि इन्होने उसी को motivate किया जिसको जरूरत थी और उसी वक्त किया जब जरूरत थी। 

अब आप सोच रहे होंगे ये motivator कैसे तो चलिये समझते है इन्होने कब किसको motivate किया और उसका क्या असर पड़ा। 

जामवंत 

भारतीय इतिहास कहें, दर्शन कहें, काव्य कहें या धर्मशास्त्र के चरित्र, मैं जामवंतजी को पहला और सबसे बड़ा motivator मानता हूँ जिन्होने हनुमान को उनके शक्ति से परिचय करवाया और समुद्र लांधने के लिए प्रेरित किया।

motivator जामवंत

Image source Goolge  

अब जरा कल्पना कीजिये उस परिस्थिति का जब जामवंतजी ने हनुमान को उनके शक्ति से परिचय करवाया और समुद्र लांघने के लिए प्रेरित किया। उस वक्त हनुमान के अलावा और भी कई महावली थे जिनको जामवंतजी इस काम के लिए प्रेरित कर सकते थे। 

लेकिन जामवंतजी ने ऐसा नहीं किया और इसके लिए उन्होने कारण भी बताया। जैसे कि उन्होने अपने बारे में बताया कि अब वो बूढ़े हो गए है और उनकी क्षमता इतनी नहीं कि वो इस काम को अंजाम दे सकें। जामवंतजी ने आज के motivator कि तरह अंगद या किसी अन्य योद्धा को ये नहीं कहा कि अगर हनुमान कर सकता है तो तुम क्यों नहीं?

जामवंतजी ये बात बखूबी जानते थे हर व्यक्ति कि अपनी एक क्षमता होती है और हरेक व्यक्ति हर काम को नहीं कर सकता। 

दूसरी बात, जामवंतजी तो शुरू से ही हनुमान के साथ सुग्रीव के मंत्रिमंडल में थे। उन्होने पहले कभी किसी अन्य काम के लिए हनुमान को प्रेरित क्यों नहीं किया? वो चाहते तो पहले भी हनुमान को बाली से लड़ने के लिए प्रेरित कर सकते थे। लेकिन वो जानते थे बाली कि मृत्यु हनुमान के हाथों नहीं होगी। 
हनुमान का समुद्र लांधने के अलावा रामायण में और कोई ऐसा प्रसंग नहीं मिलता जिसमें जामवंतजी ने कभी किसी को motivate किया हो। आखिर ऐसा क्यों? क्योकि इसकी जरूरत नहीं पड़ी। आप कह सकते हैं हनुमान को श्राप था। मैं कहता हूँ श्राप एक  प्रसंग मात्र है। इसके पीछे का तात्पर्य यही है कि जब जरूरत हो तभी किसी को motivate किया जाय। अब जरा एकबार कल्पना करें अगर जामवंतजी ने हनुमान को motivate नहीं किया होता और वो समुद्र लांघने के लिए तैयार नहीं होते तो क्या होता? मै तो कहता हूँ शायद रामायण ही नहीं लिखी जाती। 
 
भगवान श्री कृष्ण 
 जामवंतजी के बाद जो सबसे बड़े motivator हुये हैं वो हैं मेरी नजर में वो हैं भगवान श्री कृष्ण। जरा याद कीजिये महाभारत का वो दृश्य जब कुरुक्षेत्र में युद्ध के लिए सेनाएँ सजी थी और अर्जुन विपक्ष में अपने भाई - बंधुवों को देखकर अपना हथियार गाँडीव रख देते हैं और युद्ध करने से मना कर देते हैं। 

गीता का ज्ञान
Image source google 

अगर वहाँ कृष्ण न होते और गीता का ज्ञान अर्जुन को न दिया होता तो क्या होता? वेदव्यास को न तो गीता और न ही महाभारत लिखने कि नौबत आती और दोनों चीजें हमारे बीच से नदारत होती। 

अगर आपने अभी तक गीता को नहीं पढ़ा हैं तो एकबार जरूर पढ़ें। इसका एक-एक लाइन उस समय जितना प्रशंगिक था आज भी उतना ही है। 

गीता के ज्ञान में कृष्ण ने अर्जुन के एक-एक प्रश्न का उत्तर बड़े ही शांतचित मन से दिया है। अर्जुन के इतना प्रश्न करने के बावजूद कृष्ण एकबार भी विचलित नहीं हुये। कृष्ण ने अर्जुन वो नहीं कहाँ जो अर्जुन सुनना चाहते थे। कृष्ण ने वो कहा जो अर्जुन के लिए जरूरत थी। 

आज के motivator वो नहीं कहते जो आपकी जरूरत है, बल्कि वो कहते हैं जो आप सुनना पसंद करते है। जरूरत हो या न हो बराबर सुनने के लिए प्रेरित करते है। आप इसलिए सुनना पसंद करते है क्योंकि इनके विचारों में चुट्कुले और कहानियाँ ज्यादा होती है जिसे आप सुनना पसंद करते है।  

अर्जुन कृष्ण के मित्र थे। कृष्ण ने आखिर पहले ये ज्ञान अर्जुन को क्यों नहीं दिया। कृष्ण को हम भगवान मानते हैं। कहते हैं वो सबकुछ जानते थे और उन्हीं कि माया से सब हुआ। फिर तो वो ये जरूर जानते होंगे कि युद्ध से पहले अर्जुन हथियार दाल देंगे। फिर पहले ही अर्जुन को ज्ञान देकर क्यों न तैयार कर लिया। सीधी सी बात है कल को बुखार लगेगा इसके लिये आज दबाई नहीं खाएँगे। 

 चाणक्य 

इस कड़ी में मैं अगला नाम बताना चाहूँगा कुटितिज्ञ चाणक्य का। अगर थोड़ी देर के लिए हम जामवंतजी और कृष्ण को काल्पनिक पात्र मान भी लेते है और ये कहकर टाल देते हैं कि ये वास्तविक नहीं बल्कि धर्मशास्त्र कि बातें है तो चाणक्य के बारे में ऐसा नहीं कह सकते। चाणक्य के बारे में पूरा इतिहास मौजूद है। 

motivator चाणक्य
Image source Google 


सब जानते है कैसे चाणक्य ने अपने कूटनीति के बलपर एक साधारण से आदमी को पाटलीपुत्र का राजा बना दिया। वो साधारण सा इंसान था चन्द्रगुप्त, जिसने मौर्य वंश कि स्थापना की। जिसके वंश में आगे चलकर अशोक जैसे राजा हुए जिन्होने अखंड भारत का निर्माण किया। 

चाणक्य ने गुप्त वंश को समाप्त करने के लिए चन्द्रगुप्त को ही क्यों चुना? और भी तो राज्य में बहुत सारे लोग थे। सही बात ये है कि चाणक्य ने चन्द्रगुप्त के अंदर छुपी प्रतिभा को पहचाना। बस उस प्रतिभा को तराशकर उपयोग करने कि जरूरत थी। चाणक्य ने वही किया। 

अब जरा एकबार इस बात कि कल्पना करके देखें कि अगर चाणक्य ने चन्द्रगुप्त को राजा न बनाया होता तो क्या होता? भारत के नक्से कैसे होते और इतिहास पढ़ने में कितना अलग होता। 

चाणक्य चाहते तो शायद खुद भी राजा बन सकते थे लेकिन उन्होने ऐसा नहीं किया। वो एक विश्वविद्यालय के शिक्षक थे। वो ये भली-भांति जानते थे शासन करना आचार्यों का काम नहीं, ये काम किसी क्षत्रिय के लिए ठीक है। 



उपसंहार  

मेरा कहने का सीधा सा मतलब है motivational बातें सुनना और पढ़ना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन कब और कितना? जब जरूरत हो और जितनी जरूरत हो। जब इन चीजों को बिना जरूरत के अपनी आदत बना लेते हैं फिर ये मोटिवेशन नहीं रह जाता बल्कि बाबाजी का प्रवचन हो जाता है। जबतक सुनते है ठीक है जब छोड़ा सब भूल गये। 

आप अपने लिए सबसे बड़े motivator खुद हैं, एकबार प्रयाश करके तो देखिये। दूसरे लोग कहेंगे तुम वो सबकुछ कर सकते हो जो दूसरे कर सकते हैं। मैं कहता हूँ आप वो सबकुछ नहीं कर सकते जो दूसरे भी करते हैं। लेकिन एकबाट सत्य है आप बहुत कुछ कर सकते हैं, बस जरूरत हैं इसबाट को जानने की, आप क्या कर सकते है?

आप क्या कर सकते हैं ये बात भला आपसे बेहतर कौन जान सकता है।   


Saturday, October 10, 2020

asafalta ke teen sutra

 असफलता के तीन प्रमुख कारण 

सफलता और असफलता क्या है? क्या अपने लक्ष्य को न पाना असफलता है? सफलता का पैमाना क्या है? क्या कारण है कि आपका दोस्त तो सफल है जबकि आप असफल? 

Self confidence



आजकल motivational speaker को सुनने और लेख पढ़ने का प्रचलन ज़ोरों पर है। जितने भी लेख पढ़ेंगे हर जगह सफलता के सूत्र मिलेंगे और सफल होने के लिए क्या- क्या करें पढ़ने को मिलेगा। 

असफलता कि बात कोई नहीं करता। सफल लोगों के उदाहरण तो दिये जाते है लेकिन असफल लोगों के उदाहरण नहीं दिये जाते और न ही असफल होने के कारण बताए जाते है।
 
मेरे हिसाब से जितना जरूरी सफलता के रहस्य को समझना है उतना ही जरूरी असफलता के कारणों को समझना भी है। जितना जरूरी आपको ये समझना है कि आपको क्या - क्या करना है उतना ही जरूरी है ये  जानना कि आपको क्या- क्या नहीं करना है। अगर आपको ये समझना जरूरी है कि आपको क्या-क्या करना है तो आपको ये समझना भी जरूरी है  कि आपको क्या -क्या नहीं करना है।
 
वैसे तो बहुत से कारण है जो हमें असफलता कि ओर ले जाते है लेकिन उनमें से तीन प्रमुख कारण हैं जो आमतौर पर अधिकतर लोगों में पाये जाते हैं।
 

अति आत्मविश्वास (Over Confidence)

आत्मविश्वास तो ठीक है, ये होना जरूरी है क्योंकि इसके बिना कुछ नहीं कर सकते। लेकिन अति आत्मविश्वास बिल्कुल ठीक नहीं है। 

अति आत्मविश्वास



एक कहावत आपने जरूर सुनी होगी। Excess everything is bad. कुछ भी अति ठीक नहीं होता। जो दवाई हम बीमारी को ठीक होने के लिए लेते हैं अगर निर्धारित मात्रा से ज्यादा लिया जाए तो फायदे के बदले नुकसान पहुंचाता है। 

यही बात आत्मविश्वास के साथ लागू होती है। आत्मविश्वास अगर अति हो तो पहले तो ये कुछ करने नहीं देती, क्योंकि जैसे ही हम कुछ करना चाहते है बीच में ये अति आत्मविश्वास बाधा खड़ी कर देती है। मन में ये विचार उठने लगते है कि ये काम तो मेरे लिए छोटा है, ये काम मेरे लिए नहीं है, या मुझे कुछ बड़ा काम करना चाहिये। 

ये अति आत्मविश्वास दूसरा काम ये करता है कि आपसे ये गलतियाँ ज्यादा करवाता है। ऐसे लोगों में ये भावना भरी रहती है कि मैं तो सबकुछ कर सकता हूँ। ये भी कर सकता हूँ, वो भी कर सकता हूँ। अगर मेरा दोस्त ये काम कर सकता है तो मैं क्यों नहीं। 

इस विचार को हवा देने का पूरा काम करते है आज के तथाकथित motivator. अगर आपने कुछ motivator को सुना होगा या पढ़ा होगा तो आपको ये जरूर सुनने को मिला होगा कि हर काम इंसान ही करता है। लेकिन आपको ये नहीं बताया जाता कि हर इंसान कि काबिलियत अलग-अलग होती है। 

स्वयं का आकलन (Self Realization)

जबतक  स्वयं का सही से आकलन नहीं करेंगे over confidence के शिकार बने रहेंगे।  असफल होने का बहुत बड़ा कारण है self realization न करना। शायद आपने इसकी जरूरत नहीं समझी अगर जरूरत महसूस हुई तो आपको ये काम करने नहीं दिया गया 

Self realization



जैसा मैंने ऊपर बताया आपके दिमाग में ये कूट-कूट कर भर दिया गया है कि आप सबकुछ कर सकते हैं। अगर कोई दूसरा प्रधान मंत्री बन सकता है तो आप क्यों नहीं। अगर कोई दूसरा scientist बन सकता है तो आप भी बन सकते है। मैं इस theory को सिरे से नकारता हूँ। 

बहुत से लोग विद्यार्थी जीवन से ही राजनीति में लग जाते है क्या सभी प्रधान मंत्री बन जाते हैं। बिज़नस बहुत से लोग करते है लेकिन हर कोई मुकेश अंबानी नहीं बन जाता और न ही हर science पढ़ने वाला अब्दुल कलाम बन जाता है। 

ये सब बताने का मेरा उदेश्य demotivate करने का नहीं है। बस इतना बताना चाहता हूँ कि फुर्सत के क्षणो में बैठकर कभी अकेले में सोचे, आप क्या कर सकते है। इसके लिए किसी दूसरे की सलाह लेने कि जरूरत नहीं हैं। आप स्वयं के बारे में खुद जितना जानते हैं दूसरा नहीं जानता। दूसरा बस अनुमान लगाकर अपना विचार थोप सकता है। 

आप क्या कर सकते है ये कई बातों पर निर्भर करता है। जैसे :

  • आपकी शारीरिक और मानसिक क्षमता
  • आपकी रुचि 
  • आपकी पारिवारिक पृष्टभूमि 
  • आपके परिवार कि आर्थिक स्थिति 
  • आपकी इच्छाशक्ति इत्यादि 

इसको कुछ उदाहरण से समझ सकते हैं:

मान लीजिये आप अपने दोस्त को देखकर फौज कि नौकरी करना चाहते है, लेकिन न तो आपमें देश भावना है और न  ही शारीरिक परिश्रम करने की इच्छाशक्ति, आप खुद सोचें क्या आप फौज कि नौकरी कर सकते है?

एक आदमी politician है और उसे देखकर आप भी politician बनना चाहते है। अब मान लीजिये राजनीति करना न तो आपके पारिवारिक पृष्टभूमि में आता है और न ही आप रैलियों में भाग लेकर पुलिस के डंडे खाना चाहते हैं, फिर आप politician कैसे बन सकते हैं।

आए दिन राजस्थान के कोटा शहर से student के suicide की घटना सुनने को मिलती है। ये शहर देशभर में मेडिकल और Engineering की तैयारी के लिये जाना जाता है। आखिर क्यों ऐसा होता है?

माँ-बाप पैसे के बल पर अपने बच्चों को यहाँ भेजते है डॉक्टर और इंजीनियर बनाने के लिए। बच्चे की इच्छा नहीं पूछते वो क्या करना चाहते है? ये नहीं देखते उनका बच्चा क्या कर सकता है? 

कोचिंग संस्थान अलग pressure में होते है क्योंकि वो मोटी फीस माँ-बाप से ले रखे हैं। वो अपना pressure बच्चों पर डालते है। बच्चे इस pressure को झेल नहीं पाते क्योंकि वो इसके लिए नहीं बने हैं। परिणाम क्या होता है? वही, जो मैंने ऊपर बताया है।  

इसलिए इस विचार को छोड़ दीजिये कि आप सबकुछ कर सकते हैं। दूसरा कर सकता है तो आप भी कर सकते हैं।

ऊपर वाला हर किसी को कोई न कोई एक गुण जरूर देता है। आपको भी दिया है। बस जरूरत है उसे पहचानने की। एकबार उसे पहचान लेंगे आपको खुद पता चल जाएगा आप क्या कर सकते हैं। और ये काम आप खुद कर सकते है self realization से। एक बात गांठ बांध लें, काम कोई छोटा नहीं होता। 

आईआईटी और आईआईएम करने के बाद लोग सब्जी बेच रहे है, कोई चाय बेच रहा है लेकिन अलग अंदाज में। कल तक जिस काम को छोटा समझा जाता था आज एक आदमी ने अपने अलग अंदाज से उसे बड़ा बना दिया। 

उलझन (Confusion)

आपने गोविंदा की फिल्म राजा बाबू जरूर देखा होगी? फिल्म में राजबाबू एक फालतू इंसान के तौर पर होता है जो कुछ नहीं करता है। 

confuse



करिश्मा कपूर को जब वो अपने घर पर लेकर जाता है तो वो देखती है राजाबाबू डॉक्टर के लिबास में होता है। वो पुछती है तुम डॉक्टर हो तो जवाब मिलता है नहीं। उसके बाद राजाबाबू को वकील के लिबास में देखकर कहती है जरूर तुम वकील होगे? जवाब मिलता हैं मैं पाँचवीं में पाँच बार फ़ेल हूँ। 

ऐसे ही हर प्रॉफेश्नल के लिवास में राजाबाबू का फोटो टंगा होता है। क्यों ? वहीं कन्फ़्युशन। ये भी बन जाऊँ, वो भी बन जाऊँ। परिणाम होता है कुछ नहीं बन पाते हैं। पता तब चलता है जब वक्त निकल चुका होता है। 

ऐसा क्यों होता है? क्योंकि आप निर्णय नहीं ले पाते हैं मुझे क्या करना हैं? बस दूसरों को देखकर ख्वाब की ज़िंदगी में जीते हैं। 

 

उपसंहार 

अगर आपको जीवन में सफल होना है तो आत्म निरीक्षण करना पड़ेगा। जबतक आत्म निरीक्षण नहीं करेंगे आपको खुद पता नहीं चलेगा आप क्या कर सकते है? जिसका परिणाम होगा आप कन्फ्युज रहेंगे क्या करे और क्या न करें। वक्त निकाल जाने के बाद हाथ मलना और पछतावे के अलावा कुछ नहीं बचता। इसलिए self realization करे।

Friday, July 31, 2020

Blogger Sitemap Ko Google Search Console Me Kaise Submit kare

How to create and submit a sitemap for better result in google search in Hindi

Sitemap क्या है? Sitemap कहाँ से और कैसे create करते है? Sitemap submit करने के क्या फायदे हैं?

goolge search console me saitemap kaise submit kare

जब भी हम कोई ब्लॉग बनाकर पब्लिश करते है, उसके बाद बात आती है पोस्ट search engine में  या कहें गूगल में list कैसे किया जाए। 

इस मामले में ब्लॉगर पर ब्लॉगिंग करने वाले नए ब्लॉगर कुछ ज्यादा ही कन्फ्युज रहते है। 

कुछ ब्लॉगर को तो इतनी जलद्बाज़ी होती है कि उनको ये भी पता नहीं होती कि ब्लॉग को google में लिस्ट भी किया जाता है। 

दरअसल ऐसे लोग अक्सर ये सीखकर आते है कि 5 या 7 सात steps में फ्री का ब्लॉग कैसे बनाये। ऐसे में ब्लॉग बन भी जाते है और मम्मी-डेडी पढ़ भी लेते है। 

दिक्कत का पता तब चलता है जब मम्मी-डेडी पढ़ना बंद कर देते है और अन्य किसी को ये पढ़ने के लिए मिलता नहीं क्योंकि गूगल में तो लिस्टिंग है ही नहीं फिर सर्च रिज़ल्ट में कैसे आएगा? 

कुछ नए  ब्लॉगर इस confusion में भी रहते है कि ब्लॉग को goolge पर लिस्टिंग करने के लिए पैसे तो नहीं लगते। 

सबसे पहले तो एक बात बता दूँ Google, Bing या yahoo कोई भी search engine listing के लिए कोई पैसा नहीं लेता, केवल अपनी तरफ से थोड़े से प्रयास करने पड़ते है। 

हमें search engine को अपने ब्लॉग के बारे में बताना पड़ता है। जबतक बताएँगे नहीं goolge को कैसे पता आपने कोई blog बनाकर पोस्ट publish  किया है।  

इसके लिए सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि Google काम कैसे करता है? इसको समझने के लिए ये जरूर पढ़ें Googlebot क्या है

जब आपने एकबार ये समझ लिया search engine काम कैसे करता है तो फिर ये जानने की जरूरत है कि अपने ब्लॉग को search engine में listing कैसे करे। 

कई बार सबकुछ करने बाद भी नए blogger के मन में एक प्रश्न आता रहता है मेरा ब्लॉग पोस्ट google में लिस्ट हुआ या नहीं, इसका पता कैसे करूँ?

ब्लॉग गूगल में लिस्ट हुआ या नहीं ये जानने का सबसे आसान तरीका है गूगल सर्च में site:yourname.com type करके enter का बटन दबाएँ। 


blog ko google search में index कैसे करे?

जैसा की ऊपर के image में दिख रहा है। मैंने गूगल सर्च में site:hindibhashi.in लिखकर enter दबाया तो मेरे ब्लॉग के जितने भी पोस्ट ने गूगल लिस्ट कर रखा है उसको दिखा दिया। 

यहाँ एक बात समझने की जरूरत है। अगर आपका हर एक पोस्ट गूगल में listed है तो रिज़ल्ट उससे ज्यादा दिखेगा। इसका कारण है googlebot image वगैरह को भी अलग से लिस्ट करता है। 

अब आप इतना तो समझ गए की अपने blog post का listing कैसे पता करे? 


Blog को Google में  list कैसे करें? 

सच कहूँ तो एक नया blog बनाकर उसपर पोस्ट लिखकर पब्लिश कर देना बड़ी बात नहीं है। बड़ी बात है अपने ब्लॉग को search engine में listing कर उसको Google Ranking में लाना। 

Blog post Google में लिस्ट होकर search result में अच्छा प्रदर्शन कैसे करे इसके लिए हमें कई तरह के प्रयास करने पड़ते है। इनमें सबसे प्रमुख है अपने ब्लॉग का SEO (Search Engine Optimization) करना ।

जिनका ब्लॉग Wordpress पर है उनको थोड़ा सहूलियत मिल जाता है, क्यों की उनके लिए सैकड़ो plugins हैं जो काम को आसान कर देते है।

जिनका ब्लॉग Blogger Blogspot पर है वो थोड़ा इस मामले में पिछड़ जाते है। यहाँ अपने ब्लॉग को गूगल में रेंक करवाने के लिए खुद प्रयास करने पड़ते है क्यों की blogger पर बाहरी कोई भी plugins use नहीं कर सकते। Google ने जितनी सुविधा दे रखी है उसी में काम चलाना होता है। 

इसलिए बेहतर यही है कि गूगल द्वारा दिये गए सुविधाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाएँ। 

ब्लॉग को search engine में लिस्ट करवाने का काम ब्लॉग create करते समय ही शुरू हो जाता है। 

कई बार नये ब्लॉगर जल्दबाज़ी में सही से setting करना छोड़ देते है। ब्लॉग का sitemap submit करने से पहले हम थोड़ा setting के बारे में जान लेते है। 


Blog को Search Enable कैसे करें?

Blog को search engine में लिस्ट करने के लिए सबसे पहले हमें अपने ब्लॉग को search engine के लिए visible करना पड़ता है: 

1. Blogger में login कर setting पर क्लिक करें। 

आपके सामने basic setting का window खुलेगा । 

Blogger में basic setting कैसे करें
जैसा कि ऊपर image में दिख रहा है basic के नीचे privacy के सामने visible to search engine दिख रहा है? अगर दिख रहा है तो ठीक है।  नहीं दिख रहा है तो सामने edit पर क्लिक करें। 

जैसा image में दिख रहा है yes radio button पर क्लिक करके सेव कर दें। 
ब्लॉगर में basic setting की पूरी जानकारी के लिए Blogger में Basic setting कैसे करें जरूर पढे।  

Basic setting के बारे में जान लेने के बाद अब हम बात करेंगे Search preference setting की।

Blogger में Search Preference Setting कैसे करें? 

1. Blogger में login करें। 

2. Setting पर क्लिक करने के बाद search preference पर क्लिक करें। 

सामने एक विंडो खुलेगा। थोड़ा नीचे crawlers  and indexing का section दिखाई देगा। 


ब्लॉग को गूगल search में कैसे लाएँ
जैसा की ऊपर के इमेज में दिख रहा है, यहाँ तीन नाम दिख रहे है। यही तीनों वो setting है जिसके आधार पर ब्लॉग गूगल में index होता है। इन तीनों को ignore नहीं कर सकते। इन सबको एक-एक कर सही से समझने की जरूरत है। 

  • Google Search Console :  इसकी चर्चा हम बाद में करेंगे। 
  • Custom robot.txt: ये  blog के root directory में होता है। ये crawler को blog की सारी जानकारी देता है। इसके बारे में                  पूरी जानकारी के लिए Custom robot.txt क्या है पढे। 
  • Custom robots header tags:  हमारे ब्लॉग पर जितना कुछ है          जरूरी नहीं सबकुछ search में दिखाये। robot header tag के माध्यम से हम crawler को बताते हैं क्या दिखाना है और क्या नहीं दिखाना है।

 Google Search Console क्या है? 

Google Search Console Google का SEO है जो बिल्कुल फ्री उपलब्ध है। जैसा की मैंने ऊपर बताया था ब्लॉग बनाकर पोस्ट लिखना ही काफी नहीं है । आपका ब्लॉग goolge पर कैसे rank कर रहा है, कौन से keyword की क्या position है, कौन से keyword को impression मिल रहे हैं और किस keyword पर कितने क्लिक है? ये सारी जानकारी आपको Google search console देती है। 

एक बार आपने Google search console को सही से समझ लिया तो निश्चित रूप से अपने ब्लॉग को सही से operate करना समझ जाएँगे। Google search console की विस्तार से चर्चा हम किसी और पोस्ट में करेंगे। 

Sitemap क्या है, Sitemap कैसे submit करें? 

अब असल मुद्दे पर आते है और समझते हैं sitemap क्या है और इसे Google search console में कैसे सबमिट करते है। 

Sitemap एक xml file है। इसको आम बोलचाल की भाषा में समझें तो ये ब्लॉग का एक नक्शा है जो crawler को ब्लॉग की पूरी जानकारी देता है। 

sitemap kya hai aur kaise submit kare


जैसे किसी जगह का नक्शा देखकर हमें पहली नजर में पता चल जाता है कहाँ क्या है वही काम किसी ब्लॉग के लिए sitemap करता है।  

एकबार Google search console में sitemap सबमिट कर देते हैं तो आपका हर एक पोस्ट search engine में proper तरीके से index होता है और search रिज़ल्ट में दिखाई देता है। 

Sitemap कैसे create करें?

अगर गूगल की माने तो नया ब्लॉग जिसमें 500 से कम पोस्ट है उनको sitemap submit करने की जरूरत नहीं है। Google के हिसाब से ब्लॉगर blog में inbuilt sitemap hote है। 

लेकिन इनके भरोसे न रहें। मेरा जो अनुभव है ऐसे में गूगल की मनमर्जी चलती है। कोई पोस्ट index होता है कोई नहीं। 

Sitemap कैसे create करें इसके लिए अलग-अलग ब्लॉग पर अलग - अलग लिंक यानि पूरा confusion. सबमिट करने के लिए Google search console का जो interface दिखाया जाता है शायद कहीं मिले ही नहीं। 

मैं आपको आसान तरीका बताता हूँ । इस तरीके से आपको किसी दूसरे site पर जाकर sitemap create करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 


Google search console में Sitemap कैसे submit करें?

Sitemap को Google Search Console में submit करने के लिए सबसे पहले login करना पड़ता है। 

Google Search console में login करने के लिए ज्यादा मगजमारी करने की जरूरत नहीं है। क्यों की आप ब्लॉगर में already login हैं। 

जैसा की मैंने ऊपर बताया था setting पर क्लिक करने के बाद search preference पर क्लिक करना है। नये window में जैसा की हमें पहले के इमेज में देखा था, Google Search Coonsole के सामने edit पर क्लिक करना है। Google search console का नया window खुलेगा। 

Google Search Console में sitemap कैसे submit करें


Left hand में sitemap पर क्लिक करें। 



atom.xml?redirect=false&start-index=1&max-results=500

ऊपर के line को copy करें और add a new sitemap में paste करें

Submit पर click करें। 

ये है free सुंदर और बिना किसी झंझट के सबसे टिकाऊ तरीका Google search console में sitemap submit करने का। 

अक्सर ब्लॉगर कहानी को यहीं अंत कर देते है। हो सकता है इससे search engine post को index करने में थोड़ा समय ले। 

एक छोटा सा काम और करना है जिससे पोस्ट कुछ ही क्षणो में index हो जाएगा। 

जब कभी नया पोस्ट पब्लिश करें उसके बाद Google Search Console open करें। 

Google search console में sitemap कैसे submit करें


Left hand side में url inspection click पर करे। 

अब अपने पोस्ट का url copy करें और search box में paste कर दें। 

Enter दबाएँ । 

कुछ क्षणो के बाद एक massage दिखाई देगा, आपका page index के लिए लाइन मे है। 

आपने सफलता पूर्वक sitemap submit कर लिया है और post को भी Google search console में index कर लिया है। 

तसल्ली के लिए 5-10 मिनट बाद दोबारा से url inspection पर क्लिक कर उसी पोस्ट के url को search box में  paste कर enter दबाएँ। 

कुछ इस तरह का masage दिखाई देगा:

Google search console में sitemap कैसे submit करें

ऊपर masage में दिखाई दे रहा है It appear in Google search result.

Conclusion  

जितना समय हम पोस्ट लिखने में देते है उससे दोगुना समय हमें अपने पोस्ट को manage करने में देने की जरूरत होती है ताकि ब्लॉग गूगल में rank कर सके। 

इसके लिए सबसे पहले जरूरत होती है ब्लॉग को google में index करने की। Blog google में सही से index हो इसके लिए robot.txt, header tags और Sitemap क्या है, Sitemap को Google search console में सबमिट कैसे करे, इस बात को समझने की जरूरत होती है। 


आशा है पोस्ट आपको पसंद आया होगा। कोई प्रश्न हो तो comment box में पूछें। 

नीचे के social media button से share करें ताकि दूसरे भी लाभ उठा सके। 

Sunday, July 26, 2020

Blogger me Custom Theme Kaise Add Kare

Blogger में Custom Theme कैसे add/change करें (How to add custom theme in Blogger Blog)?


blogger me custom theme kaise change kare.


बहुत सारे नये लोग जो अभी-अभी ब्लॉग के क्षेत्र में आये है या कुछ दिन हुआ है, उनके मन में एक प्रश्न आता है ब्लॉग का theme कैसे change करें? क्या अपने blogger blog में custom theme add कर सकते हैं? हमें अपने ब्लॉग का theme change करना चाहिए? इत्यादि। 

आज हम इसी पर चर्चा करेंगे की हमें अपने blogger blog का theme कैसे change करना चाहिये, theme क्यों change करना चाहिये, थीम कैसी होनी चाहिये? 

जब भी कोई ब्यक्ति ब्लॉगिंग के बारे में सोचता है तो सौ में से नब्बे लोगों का निर्णय होता है कि शुरुआत फ्री ब्लॉग यानि Blogger Blogspot से किया जाय। 

निर्णय सही भी है क्योंकि Blogger Blogspot एक ऐसा प्लैटफ़ार्म है जहां नयाँ ब्लॉग शुरू करने के लिए एक रुपया खर्च नहीं होता। एक नये ब्लॉगर की जितनी भी जरूरतें हैं यहाँ वो सबकुछ फ्री मिलता है। 

चुकी गूगल ब्लॉगर पर सबकुछ फ्री देता है इसलिए यहाँ बाहर से कुछ add करने की जरूरत नहीं पड़ती और न ही गूगल इस बात की इजाजत देता है। 
लेकिन  theme aur domain name दो चीजें ऐसी है जिसे हम बाहर से ब्लॉगर ब्लॉग पर add  कर सकते है। अपने एक पोस्ट में मैंने बतला रखा है Blogger blog में custom domain कैसे add करें। 

आज हम इस पोस्ट में चर्चा करेंगे blogger ब्लॉग में custom theme कैसे add/change करें? 

Blogger Blog का Theme क्यों change करे (Why add custom theme)? 


जैसा कि मैंने बताया Blogger blog पर सबकुछ फ्री मिलता है, लेकिन ज्यादा फ्री का लालच भी अच्छा नहीं होता। अगर ब्लॉगिंग केवल शौकिया तौर पर करना चाहते है जिसे इंग्लिश में mom blogger कहते है (वो blog जो केवल आपकी मम्मी पढे) तब तो ठीक है। 

अगर चाहते है कि professional ब्लॉगर बनना है फिर थोड़ा broad minded होने कि जरूरत होती है। 

Blogger blog में थीम change करने के लिए चाहे तो आप अपने पसंद के हिसाब से एक custom thime खरीद भी सकते है या थोड़ा प्रयास करके फ्री  थीम download कर add कर सकते है। 

Theme क्यों change करना चाहिये?

एक कहावत आपने जरूर सुनी होगी "First impression is the last impression". 

किसी भी website या blog का थीम ऐसे ही है जैसे किसी product का packaging या किसी showroom का interior decoration जहां ग्राहक का सबसे पहले नजर पड़ता है। 

यही हाल कुछ website या ब्लॉग का भी है। जब भी कोई visitor आपके साइट पर जाता है तो सबसे पहले उसकी नजर साइट के presentation पर पड़ती है। 

Blogger ब्लॉग के साथ जो थीम होता है वो बहुत ही basic होता है। इसमें feature न के बराबर होते है। 

वहीं custom theme में आज के जरूरत के हिसाब से वो सारी सुविधाएं मिलती है जिसकी हमें जरूरत होती है। 


Theme कैसी होनी चाहिए (What features should be in custom theme)? 



  • SEO Friendly Theme 

  • Adsense Friendly 


  • Social Media Button 
  • Attractive Look 
  • Error 404 
  • Feature Post 
  • Fast Loading
  • Mobile Friendly 

SEO Friendly Theme 


किसी भी theme का SEO friendly होना बहुत जरूरी है। Theme का SEO friendly होने के अर्थ है अपने ब्लॉग का मनचाहा seo कर सके ताकि ब्लॉग पर ज्यादा से ज्यादा traffic आ सके। 

आज के competition के दौर में जहां हरेक blogger अपने ब्लॉग को top पर rank करवाने के लिए SEO के रूप में न जाने क्या-क्या तरीके अपनाते है, वैसे में अगर theme seo friendly नहीं है फिर कहाँ टिक पाएंगे। 

Adsense Friendly Theme 


हर ब्लॉगर का ब्लॉगिंग करने का आखिरी लक्ष्य होता है ब्लॉग से पैसा कमाना। किसी भी blog में income का मुख्य जरिया होता है Adsense और affiliate marketing. 

Adsense और affiliate marketing से तभी कमाई किया जा सकता है जब theme add friendly हो यानि theme में add पोस्ट करने के लिए space उपलब्ध हो। 

Adsense approval के लिए गूगल का page के बारे में eligibility requirement जरूर जान लें। 

Social Media Button 

आज के समय में अगर किसी theme में social media button नहीं है तो वो बेकार है। 

जहां अपने ब्लॉग पर organic traffic के लिए हमें महीनो इंतजार करना पड़ता है, वही social media traffic का एक ऐसा माध्यम है जिससे हमें तुरत traffic मिलता है। Organic traffic के अलावा हमें किस-किस माध्यम से तुरत ट्रेफिक मिलता है उसके लिए इस लिंक पर जाकर जान सकते है। 6 traffic source without seo 

Social मीडिया से traffic तभी मिलेगा जब थीम में पोस्ट को share करने के लिए social media बटन हो। 


 Attractive Look 

जैसा की मैंने ऊपर बताया किसी भी ब्लॉग या website का attractive theme first impression होता है। 

अगर ब्लॉग का थीम attractive नहीं है तो visitors ऐसे ब्लॉग पर ज्यादा देर नहीं टिकते न ही दुबारा वापिस आते है। 

Error 404 page 

ये किसी भी theme का technical पहलू है। ये बहुत ही महत्वपूर्ण fuction है। इसकी जरूरत तब पड़ती है जब हम अपने ब्लॉग से किसी पोस्ट को delete कर देते है। 

मान लीजिये हमें किसी पोस्ट को डिलीट तो कर दिया लेकिन link अभी भी बना हुआ है। ऐसे में क्या होगा?

जब कोई visitor उस link के माध्यम से वैबसाइट पर जाएगा और उसे वो पोस्ट नहीं मिलेगा। ऐसे में क्या होगा? visitors frustrate होगा और दुबारा ऐसे साइट पर जाना पसंद नहीं करेगा। 

Error 404 visitors को बताता है page उपलब्ध नहीं है और हमारे द्वारा सेट किए गए दूसरे page पर redears को redirect करता है। 

Feature Post 

आमतौर ये सुविधा हरेक थीम में नहीं पाया जाता। Google ने अपने users को ये सुविधा नया में ही दिया है। Feature post वो post होता है जो हमें लगता है कि ये हमारे ब्लॉग का first impression सावित होगा। 

Feature post को हमेसा front में रखा जाता है ताकि visitors कि पहली नजर इस पर पड़ सके।

Fast Loading  

किसी भी blog या website के theme का loading speed बहुत मायने रखता है। एक ऐसा theme जो load होने में ज्यादा समय लेता है, इसका असर सीधे तौर पर traffic पर पड़ता है। 

किसी के पास इतना समय नहीं कि वो किसी वैबसाइट को load होने के लिए ज्यादा देर इंतजार करें। किसी theme का slow speed होना ये Google ranking को भी प्रभावित करता है। Google भी ऐसे साइट को पसंद नहीं करता। 

आपके website का loading speed चेक करने के लिए Goolge के check your website's loading speed पर जाकर चेक कर सकते है। 

Hubspot के reposrt के अनुसार अगर किसी website की loading time एक second ज्यादा है तो इस के कारण 11% traffic कम हो जाता है। 

Google के report के अनुसार अगर load time 3 seconds ज्यादा है तो इसका असर 53% traffic पर पड़ता है।

2018 Google Speed Update के अनुसार किसी भी वैबसाइट के loading speed का असर उसके SERP (Search Engine Rank Page) पड़ता है।  


Mobile Friendly Theme 


आज के समय में किसी भी थीम का mobile friendly होना बहुत जरूरी है। आजकल बहुत कम लोग computer या laptop पर पोस्ट पढ़ते है। 

किसी के पास इतना समय नहीं है। लोग चलते - चलते या काम के दौरान जब कभी बीच-बीच में समय मिल जाता है पोस्ट पढ़ लेते है। 

ऐसे में अगर कोई theme mobile friendly नहीं है इसका मतलब है blog सही से खुलेगा नहीं जिससे पोस्ट पढ़ा जा सके। visitor सदा के लिए उस ब्लॉग को छोड़ देना निश्चित है। 

आपके website का theme mobile friendly है या नहीं इसको जाँचने का बहुत ही आसान तरीका है। Google के Mobile Friendly Test page पर जाकर अपने website का url डाले, result मिल जाएगा। 

Custom Theme कैसे पाएँ ? (How to find custom theme for blogger)?

अब जबकि हमने ये जान लिया blogger में custom का क्या महत्व है, फिर बात आती है custom theme download कहाँ से download करे?

इस काम में बहुत ही सावधानी की जरूरत होती है क्योंकि बहुत सारे ऐसे भी वैबसाइट है जो theme के malware भी डाल देते है। एकबार ये malware हमारे कम्प्युटर में आ गए फिर सारा डाटा हमारे कम्प्युटर से चुरा लेते है। 

इसके अलावे भी कई प्रकार के नुकसानदेह हमारे लिए सावित होता है। इसलिए इस बात की जरूरत होती है कि theme को किसी authentic वैबसाइट से download किया जाय। 

बहुत सारे websites है जहां से theme download किया जा सकता है। btemplate colorrib  और gooyaabitemplates जैसे साइट से free में अपने पसंद का theme download कर सकते है। 

Blogger का theme कैसे बदलें (How to change/ update blogger theme)?

अब तक हमने जाना Blogger पर custom theme add करना क्यूँ जरूरी है और custom theme कहाँ से download करें। 

अब जो सबसे जरूरी है बात है वो है custom theme को अपने ब्लॉग या website पर uipload कैसे करें?

यहाँ पर अपलोड करने से पहले एक बात समझना जरूरी है कि जो भी theme आपने add करने के लिए download किया है उसे एक folder में save कर ले। 

जब हम theme download करते है तो वो zeap या raar formate में होता है। उसे extract कर ले। Blogger केवल .xml extension स्वीकार करता है। 
Blogger layout अब बदल चुका है। इसके layout के साथ function में भी कई तरह के बदलाव आ चुका है। 

यहाँ हम blogger के दोनों interface में जानेंगे की theme को कैसे change किया जाता है। 

New Blogger Interface 

1. सबसे पहले blogger पर जाकर sign in करे। 

2. Dashboard में theme पर click करें। 

3. page के ऊपर 3 dot दिखाई देंगे, उसपर क्लिक करे। 

custom theme कैसे change करें

4. कुछ इस तरह का option आएगा। 


blogger में custom theme कैसे change करें


सबसे पहले पुराने थीम का backup ले लें। 

अब Restore पर क्लिक करे। computer से upload का option आयेगा, उसपर क्लिक करे। 

अपलोड होने के बाद थीम को save कर लें। 

यहाँ एक दूसरा option HTML code को copy paste करना भी है। अगर आप बिलकुल नए है तो मैं इसकी सलाह नहीं दूंगा। 

Blogger के पुराने interface पर theme कैसे change करें? 

Blogger के पुराने inteface पर theme change करना और भी आसान है, यही कारण है की नए ब्लॉगर जब-तब अपने ब्लॉग का थीम बदलते रहते है। 

1. सबसे पहले blogger पर जाकर login करे। 

2. Dashboard में theme पर क्लिक करे। 

3. Right hand के ऊपर Backup/Restore पर क्लिक करे। 

4. कुछ इस तरह का window खुलेगा। 


blogger में custom domain कैसे change करें

5. Upload क्लिक कर अपने computer से theme upload करे और save करे। 

आपका थीम सफलता पूर्वक upload हो गया है। 

अब जल्द से जल्द अपने ब्लॉग का layout ठीक कर लें। ताकि visitor पर इसका impact न पड़े। 


Conclusion 

जैसा की हमने ऊपर चर्चा की blogger का थीम शौकिया ब्लॉगर के लिए तो ठीक है लेकिन professional blogger को किसी भी तरह ये शूट नहीं करता। 

अगर ब्लॉगिंग का उद्देश्य आगे जाकर पैसा कमाना है तो समय के हिसाब से चलना जरूरी हो जाता है ताकि competition में बने रहे। 

अपने ब्लॉगर ब्लॉग का थीम change करने से पहले से पहले ये जानना जरूरी है कि Blogger theme कैसे change करे, कौन सी थीम select करे, थीम की quality क्या होनी चाहिए, Theme change करने के क्या-क्या फायदे है?

मुझे आशा है ये पोस्ट आपको पसंद आया होगा और आपको इससे लाभ मिलेगा। 

कोई भी प्रश्न हो तो कमेंट में लिखें। 

नीचे के social media बटन से अपने दोस्तों को share करे ताकि दूसरे भी लाभ उठा सके।