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Krishna

Tuesday, April 14, 2020

कुंडली देखे या अपने प्रेम पर विश्वास करे।

शादी से पहले कुंडली देखें या अपने प्रेम पर विश्वास करे 

Love vs. Kundli



विवाह समाज की मूलभूत कड़ी 

मानव समाज में विवाह की परंपरा कब से चली आ रही इसका तो कोई इतिहास मालूम नहीं, लेकिन इतना मानकर चल सकते है कि जब से मानव जाती बंदर प्रजाति से विकसित होकर मानव रूप में आया होगा और एक समाज के रूप में संगठित हुआ होगा तब से शायद विवाह परंपरा कि शुरुआत हुई होगी। इस परंपरा को शुरुआत करने के पीछे जो भी मकसद रहा हो इतना तो मानकर चल सकते है कि हम वैचारिक रूप से अन्य जीवों से ज्यादा विकसित है। किसी भी प्रजाति को आगे बढ़ाने के लिए नर और मादा के मिलन कि आवश्यकता होती है। जानवरों में यह काम स्वकछन्द रूप से होता है, लेकिन हम मानव चुकी वैचारिक रूप से विकसित हैं इसलिए इस व्यवस्था को कायम रखने के लिए विवाह रूपी परंपरा को जन्म दिया। वैसे इसके पीछे एक तर्क ये भी दिया जाता है कि स्त्री चुकी शारीरिक रूप से मर्द से कमजोड़ होती होती है, उसको एक सामाजिक सुकक्षा चाहिए, इसलिए इस परंपरा का जन्म हुआ होगा। खैर जो भी हो आज के तारीख में इस संस्था पर खतरा मंडरा रहा है। 

खतरा क्या है 

विज्ञान का एक सिद्धांत है:" विज्ञान विकास करके जितना आगे बढ़ता जाता है उतना ही वो विनाश कि तरफ बढ़ता है " जैसे मानव ने विज्ञान को विकसित करके परमाणु बम बना लिए, और आज वो उसी परमाणु बम के कारण विनाश के कगार पर खड़ा है।

आज के दौर में मानव अपने - आपको ज्यादा सुशिक्षित और सभ्रांत समझता है। सनातन काल से चले आ रहे कई सामाजिक परंपरा को रूढ़िवादी मानता है, किसी बंधन में न बंधकर स्वक्षंद जीवन जीना चाहता है जिसका परिणाम है : "Live in Relationship" और Divorce यानि तलाक। 

Live in Relationship  
हाल फिलहाल ये व्यवस्था बड़े जोड़ो पर है, एक-दूसरे के प्रति कोई ज़िम्मेदारी नहीं। जब तक जी चाहा साथ रहा, जब जी चाहा अलग हो गया। हद तो तब होती है जब ऐसे मामले किसी कारणवश न्यायपालिका तक पहुँचती है फिर एक दूसरे पर इल्जाम लगने शुरू होते हैं। हाँ अलग होने से पहले ये एक-आध बच्चे जरूर पैदा कर लेते है। एक समय था किसी बच्चे के सर से पिता का साया उठ जाता था तो हम ऐसे बच्चों को अनाथ कहते थे। आज के तारीख में पिता सामने खड़ा होता है फिर भी बच्चा अनाथ होता है। जन्म प्रमाणपत्र से पिता का नाम गायब। 

पहले ये व्यवस्था केवल अपने आपको पश्चात्य समझने वालों में हुआ करते थे अब तो ये आम बात हो गयी है। ऐसे बच्चों को ज़्यादातर उसकी माँ ही पालती है। एकबार अलग हुए फिर ये अलग जोड़ी कि तलाश करते हैं। ये व्यवस्था पूर्णतया जानवरों में पाया जाता है। अब आप खुद अनुमान लगा लें ये सुशिक्षित हैं या सभ्यता के विनाश कि तरफ जा रहे हैं। 

प्रेम विवाह  

पहले भी होते थे, लेकिन आज ये आम बात हो गयी है। पहले प्रेम विवाह भी एक दायरे के अंदर था आज जैसे- जैसे इसकी संख्या बढ़ रही है तलाक के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे लोगों के अपने तर्क हैं, जैसे "जिनको हम जानते नहीं उनके साथ जीवन भर के लिए कैसे बंध जाएँ, विवाह पूर्व एक-दूसरे को जानना जरूरी है कि हमारे विचार मिलते है  कि नहीं"। आज केवल लड़के ही नहीं लड़कियां भी शिक्षा और नौकरी के लिए बाहर निकल रही हैं, यही कारण है कि अंजान लड़के-लड़कियों को आपस में मिलने का मौका मिलता है। अक्सर ये मिलना प्रेम, फिर विवाह बंधन के परिणाम तक जाता है। इन सब में कहीं कोई बुराई नहीं है। 

दिक्कत तब शुरू होती है जब ऐसे ज़्यादातर विवाह जल्द ही तलाक के परिणाम तक पहुँचते हैं। दुष्परिणाम सबके सामने है। कभी-कभी चर्चा उठना लाजिमी है कि प्रेम विवाह सुरक्षित है या पारंपरिक विवाह। आखिर क्यों ऐसे प्रेम विवाह के परिणाम तलाक तक पहुँचते हैं इसकी चर्चा हम आगे करेंगे। 

कूंडली मिलान क्या है और क्यों कि जाती है 

Love Vs. Kundli
ये भी ज्यादा तथाकथित सभ्रांत परिवारों का विषय है, जब शादी से पहले लड़के-लड़कियों कि कुंडली मिलान होती है, ये जानने के लिए कि इनकी शादी-शुदा ज़िंदगी कैसी रहेगी। परिणाम आगे जो हो। 

कुंडली मिलान क्या है 

कुंडली मिलान जिसे ज्योतिषी कि भाषा में अष्टकूट मिलान कहते हैं। वैसे तो इसके अलावा भी ज्योतिषी में कई तरह के मिलान कि व्यवस्था दी गयी है लेकिन आजकल के प्रॉफेश्नल ज्योतिषी इन बिन्दुओं पर गौर नहीं करते। अष्टकूट मिलान में मुख्य रूप से लड़का-लड़की के आठ गुणो को मिलाया जाता है जो इस प्रकार है :
गुण  अंक   संबंध 
वर्ण   1    स्वभाव और रंग 
वश्य  2     मूल यानि प्रादुर्भाव से है 
तारा  3     दोनों का भाग्य 
योनि  4     संभोग से है 
मैत्री   5     स्वभाव से है 
गण   6     समाजिक स्थिति को दर्शाता है 
भकुट  7     जीवन और आयु से है 
नाड़ी   8    इसका संबंध होने वाले संतान से है  
     ............

कुल संख्या हुए 36. मान्यता है कि इसमें से कम से कम 18 गुण मिलने पर शादी हो सकती है। परिणाम में जीतने ज्यादा अंक होंगे शादी-शुदा ज़िंदगी उतनी ज्यादा खुशहाल होगी। 

वास्तविकता क्या है 
तलाक यहाँ भी होते है, कम या ज्यादा। आखिर ऐसा क्यों है। हमने ऊपर चर्चा कि थी आजकल के लोगों के विचार धारा की। आपस में जानने की बात। ये कुंडली भी इसी का पर्याय है। कुछ लोग सीता और राम का उदाहरण देते है। दोनों के 36 में से 36 गुण मिले थे, फिर भी सीता की वैवाहिक ज़िंदगी दुखभरी रही। 

ये जलद्वाजी के विचार है। सीता का कभी भी राम के साथ वैचारिक मतभेद नहीं रहा। उन्होने उस ज़िंदगी को खुद स्वीकार किया जिसको हम जानते है। इसमें कुंडली का कोई दोष नहीं। 

उपसंहार 
हमारे बीच जो सबसे प्रचलित ज्योतिषी सिधान्त है उसमें पराशर ऋषि द्वारा लिखित वृहद पराशरी प्रमुख है। ज्योतिष के मुख्यतया 
दो अंग है: गणित और फलित। सौ में से दो-चार ऐसे ज्योतिषी नहीं मिलेंगे जिनको गणित का थोड़ा भी ज्ञान हो। ये लोग किसी साइबर कैफे से किसी लोकल software से 20-30 रुपए में कुंडली निकाल कर फलादेश करते हैं। ये लोग रटे - रटाए सिद्धांत पे चलते है। पराशर ऋषि ने वृहद पराशरी में फलादेश के लिए एक विचार दिये है : " स्थान, समय और परिस्थिति के हिसाब से फलादेश में परिवर्तन हो सकता है। इसपे कोई विचार नहीं करता, शायद दूकानदारी में कमी आ जाएगी?

मैं जिस मैथिल समाज से आता हूँ वहाँ एक आध उदाहरण को छोड़ दिया जाय तो सारे विवाह लड़के-लड़की के माता - पिता ठीक करते हैं, लड़के - लड़की एक दूसरे से बिलकुल अंजान होते है, कोई कुंडली मिलान नहीं होते। इन सबके बावजूद वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। क्यों ????????

पति-पत्नी का रिस्ता आपसी सहमति और समर्पण से चलता है। एक - दूसरे के प्रति विश्वास और छोटे-मोटे त्रुटियों के साथ समझौता सुखी वैवाहिक जीवन के आवश्यक तत्व है, जिनका पाश्चात्य शैली के परिवारों में धोड़ अभाव होता है। जहां लड़का - लड़की दोनों आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होते है, जो केवल अपने बच्चों के भविष्य को न देखकर केवल अपने सुख को देखते है, जहां पति-पत्नी एक दूसरे से जल्द ऊब जाते हैं, वहाँ तलाक रूपी समस्या आम बात है।  

जहाँ समझौता है वही परिवार सुखी है, जो मानकर चलते है शादी सात जन्मों का रिस्ता है। ऐसे में न कुंडली मिलाने की जरूरत है न ही जरूरत है किसी प्रेम विवाह की। 

ऊपर के मेरे विचार अपने हैं, जरूरी नहीं आप इससे सहमत हों। किसी के मन को ठेस पहुंचाना मेरा उद्देश्य नहीं है। आप अपने विचार कमेंट में जरूर लिखें। 



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