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Krishna

Tuesday, April 21, 2020

मांगलिक दोष एवं इसकी सत्यता

मांगलिक दोष क्या है, क्या मंगल ग्रह शादी में व्यवधान उत्पन्न करता है?

kya maaglik hona ghatak hai

मंगल ग्रह ज्योतिष की नजर में 

मंगल ग्रह को नवग्रह में एक प्रमुख ग्रह माना गया है। इसकी भूमिका सेना नायक की है। स्वभाव में उग्र होने के बावजूद इसे कल्याण कारी माना गया गया है। यही कारण है की हम किसी कार्य के लिए मंगल कामना करते हैं। 

अगर ज्योतिष शास्त्र की माने तो किसी इंसान के ऊपर जिस ग्रह का प्रभाव होता है उस ग्रह का स्वभाव भी संबन्धित व्यक्ति को प्रभावित करता है। इस तरह कह सकते है कि अगर किसी व्यक्ति के ऊपर मंगल ग्रह का प्रभाव होगा तो व्यक्ति में सेना नायक की तरह leadership होगा और वह सबका भला चाहने वाला होगा। 

मंगल ग्रह से कई राजयोग बनते है, कहते है जिस व्यक्ति की कुंडली के दशवे घर में मंगल होता है वो कुलदीपक होता है। फिर सवाल उठता है मंगल ग्रह से इतना भय क्यों? वैसे तो मंगल ग्रह के क्रूरता के बारे में कई भ्रांतियाँ फैली हुई हैं लेकिन में यहाँ बात करूंगा मांगलिक होने की। 

मांगलिक क्या है 

लग्ने व्यये पाताले जामित्रे चाष्ट्मे कुजे । 
कन्याभर्तुविनाश: स्याद्भर्तुभार्याविनाशनम् । ।  

कुंडली में मांगलिक दोष


अर्थात किसी भी व्यक्ति के जन्मकुंडली में लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम, द्वादश भाव में से किसी भी भाव में मंगल रहने पर व्यक्ति मांगलिक कहलाता है। बारह में से पाँच घर। कोई-कोई पंडित ज्योतिष दूसरे और नवम भाव को भी मांगलिक के पक्ष में मानते है। दो में से एक मानकर चलते हैं। यानि कुल बारह में से 6 भाव में मंगल का होना, मांगलिक माना जाएगा। हद तो तब हो जाती है जब कभी-कभी कुंडली देखकर पंडित कहते है ये बच्चा तो डबल मांगली है। अब ये डबल मांगलि क्या है, मुझे नहीं पता, ज्योतिष शास्त्र में भी कहीं इसका वर्णन नहीं है, क्योंकि मंगल ग्रह तो एक ही है, फिर डबल मांगली कहाँ से आ गया। 

इस तरह देखा जाय तो संसार में जीतने व्यक्ति हैं उनमें 50% लोग मांगलिक हैं, क्योंकि हरेक व्यक्ति के कुंडली में कुल बारह भाव ही होते हैं। भाव से यहाँ तात्पर्य कुंडली के घर यानि राशि से हैं। 

राशि क्या है 

पूरा आकाश मण्डल जिसमें सारे ग्रह-नक्षत्र मौजूद है, उनको कुल बारह भागों में बाँटा गया है और हरेक का एक नाम दिया गया है जो इस प्रकार है 

राशि चक्र कुंडली में

मांगलिक दोष की भ्रांतियाँ 

वैसे तो मांगलिक होने के कई दोष बताये गये है लेकिन मैं यहाँ केवल वैवाहिक दोष के बारे में चर्चा करूंगा। 

भ्रांति 
अगर इन भ्रांतियों पे विश्वास करें तो मंगल ग्रह को मारनात्मक यानि मारने वाला बताया गया है। यानि जो स्त्री या पुरुष मांगलिक है उनमे आपसी कलह से लेकर मृत्यु तक निश्चित है। 

मंगल दोष जातक (स्त्री या पुरुष ) के 28 वर्ष के बाद समाप्त हो जाता है। 

मांगलिक व्यक्ति का विवाह मांगलिक कन्या के साथ होने से दोष नहीं लगता । 

मेरा प्रश्न या जवाब  

जैसा की मैंने ऊपर बताया है मांगलिक होने के भ्रांतियों को माने तो 50% लोग मांगलिक हैं। इसके अलावा कई बड़े-बड़े दोष ज्योतिष में वर्णित है जैसे शनि की साढ़ेसाती, गंड मूल, पितृ दोष इत्यादि। ये भी मानव जीवन में उथल-पुथल मचाते है। 

इन भ्रांतियों को माने तो पूरे मानव समाज का जीवन अस्त-व्यस्त होना चाहिए। मांगलिक दोष के कारण समाज के आधे परिवार में पति-पत्नी में कलह, मारपीट, तलाक और बहुत बड़ी संख्या में विधवा या विधुर होना चाहिए। 

28 वर्ष के बाद मंगल दोष खत्म हो जाता है, क्यों? मंगल ग्रह आकाश से गायब हो जाता है क्या? इसके पीछे का कारण पता नहीं। 

एक मांगलिक लड़के का विवाह मांगलिक लड़की के साथ करने से मंगल दोष दूर हो जाता है। मंगल को स्वभाव से उग्र माना गया है। दो उग्र स्वभाव के इंसान को ज़िंदगी भर के लिए एक डोर में बाधेंगे परिणाम की कल्पना आप खुद कर लें। सामाजिक मान्यता है कि दो मे से एक को नम्र स्वभाव का होना चाहिए तो ज़िंदगी की गाड़ी आराम से चलती हैं।
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अपना अनुभव 
मैं जिस मैथिल समाज से हूँ वहाँ आधे से अधिक लड़कियो के कुंडली होते ही नहीं। अगर किसी ने पिता धर्म निभाते हुए कुंडली बनवा भी दिया, उसको माताजी कहाँ रख दी कि वक्त पे मिलता ही नहीं। ये मैं upper cast की बात कर रहा हूँ। Lower cast की बात करूँ तो उनमें अभी भी न तो लड़के न लड़की का कोई जन्म कुंडली होता हैं। 

मैंने आजतक किसी को शादी से पहले कुंडली मिलते हुए या मांगलिक दोष पर विचार करते हुए नहीं देखा है। इस सबके के बावजूद हमारे यहाँ न तो पति -पत्नी में किसी प्रकार का कलह है, न ही तलाक हैं और न ही किसी को ये कहते सुना है कि फलाने स्त्री या पुरुष मांगलिक दोष के कारण विधवा या विधुर हो गए। 

एक तथाकथित ज्योतिष महाशय से मैंने यही बात पूछा तो बोले " देखते नहीं हैं गाँव में कितनी बूढ़ी औरते विधवा होती है।" 

मैंने उनको पूछा " आपके दादाजी आपके दादीजी से उम्र में कितने वर्ष बड़े हैं।" उनका जबाव था " करीब-करीब 10-12 वर्ष(पहले के समय में इतना अंतर समान्यतः हुआ करते थे, इसका प्रमुख कारण लड़कियों की छोटी उम्र में शादी)। " मैंने उनको बोला अब अगर आपके दादाजी आपके दादीजी से 10 वर्ष पहले निकल लिए तो इसमें मंगल को क्यों कोसते हो? सोचकर जबाव दे देना। आजतक जबाव नहीं दे पाये। दश साल बीत गए। 

यथार्थ क्या है  

अब एकबार फिर से कुंडली पे आते हैं। पहले इसको वर्तमान समस्या कोरोना कि  दृष्टि से समझते हैं। अगर मेडिकल एक्सपर्ट की माने तो जिस व्यक्ति का इम्यून सिस्टम अच्छा है, जो जवान है, उसको ये वाइरस लगने के बाद भी असर नहीं दिखाता और एक समय बाद वाइरस खत्म हो जाता है। 

कुछ ऐसा ही मांगलिक दोष के साथ भी है। कुंडली में ऐसे  अनेकों योग बनते हैं जो मांगलिक दोष को स्वतः खत्म कर देते हैं। कुछ उदाहरण :

1. मंगल के साथ यदि कोई और पापग्रह जैसे शनि, राहू, केतू हो तो दोष खत्म हो जाता है। 

2. यदि मंगल पर गुरु का पूर्ण दृष्टि हो तो दोष खत्म हो जाता है। 

3. यदि मंगल अपने मित्र राशि जैसे सिंह, कर्क घणु, मीन में स्थिति हो तो दोष खत्म हो जाते हैं। 

4. यदि मंगल का चन्द्र और गुरु से युति हो तो दोष नहीं लगता । 

ऐसे अनेकों योग हैं जो मांगलिक दोष को खत्म कर देता हैं। ये मैं नहीं कह रहा हूँ, ज्योतिष में वर्णित है। ये सब बातें आपको कोई भी पंडित नहीं बताएगा, अगर बता दिया फिर आप उसके पीछे क्यों भागोगे। 

मैंने कई बड़े-बड़े ज्योतिषी के website देखे ये जानने के लिए की ये इस मांगलिक के बारे में क्या कहते हैं। एक-आध ही ऐसा मिला जो इन योंगों की चर्चा करते हैं। बाकी सबका एक ही विचार " ऐसा कहा जाता है" उनकी अपनी कोई राय नहीं, कोई लॉजिक नहीं बस खर्चे के उपाय बता देते हैं। 

सही बात क्या है 

इन सब चक्कर में बहुत से लोग ज्योतिष शास्त्र को ही गलत और झूठा करार देते हैं। वो भी गलत हैं। ज्योतिष शास्त्र हजारों वर्षों से चल रहा है, झूठ इतना लंबा नहीं टिकता । 

हर विज्ञान कि एक सीमा है। कोरोना को ले लें। इंसान ने इंसान को मारने के लिए एटम बम, हाइड्रोजन बम, फादर आफ बम और न जाने क्या-क्या बना लिये, जब एक वायरश ने हमला किया तो उसका कुछ नहीं उखार पा रहे हैं। 

ज्योतिष विज्ञान कम, सिद्धांत पर आधारित ज्यादा हैं। किसी भी फलादेश का सिद्धांत के आधार पर अनुमान लगाया जाता है। अनुमान लगाते समय स्थान, समय और परिस्थिति का ख्याल रखने का स्पष्ट विधान है। कभी किसी पंडित को आपने ऐसा करते देखा हैं। आप T. V पर देखते होंगे, कोई व्यक्ति अपना जन्म समय, तारीख और जन्म स्थान बतलाता है, लैपटाप पर आधे मिनट में कुंडली तैयार साथ ही पंडित का फलादेश कहना शुरू। 

अब यहाँ पर दो बातें हैं। इसको एक उदाहरण से समझे। मान ले एक व्यक्ति किसी अस्पताल में अपना इलाज करवा रहा है, वहाँ वो ठीक नहीं हो रहा, फिर वो किसी दूसरे अस्पताल में जाता है, मैं सरकारी अस्पताल कि बात कर रहा हूँ। फिर क्या होता है वहाँ का डॉक्टर फिर से पूरा टेस्ट करवाता है क्यों? क्योंकि उसे दूसरे के रिपोर्ट पर विश्वास नहीं है। कितने पंडित अपने हाथ से कुंडली बनाते हैं? 100 मे से 90 को बनाना नहीं आता। 
बाज़ार में मिलने वाले फ्री software का इस्तेमाल करते हैं। 

दूसरी बात किसी भी बने बनाए कुंडली से फलादेश करने के लिये कम से कम 15 मिनट विश्लेषण के लिये चाहिए। अगर एक जगह कोई गलत योग बन रहा है तो दूसरा कोई अच्छा योग उसको निष्क्रिय कर देता है, जैसा मैंने ऊपर मांगलिक दोष में बताया है। 

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उपसंहार  

पति-पत्नी का रिस्ता आपसी सहमति से चलता हैं। एक अगर नाराज हो तो दूसरे को मनाने कि कला आनी चाहिए। पति - पत्नी के बीच अहं कैसा। आज हो क्या रहा है, पति एक मकान अपने नाम ले ले तो पत्नी लट्ठ ले के पति के सामने खड़ी हो जाती है। पति-पत्नी के बीच संपती का हिसाब रहता है। ये सब उसी परिवार में होता है जो अपने आप  को पाश्चात्य समझते है, वही कुण्डली भी  दिखाये जाते हैं, वही तलाक भी होते हैं और वहीं परिवारिक कलह भी होते है। हमारे समाज में ये सब दुर्गुन नहीं पाये जाते इसलिए हम मांगलिक होते हुए भी खुश हैं।


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