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Krishna

Saturday, May 9, 2020

bounce rate 15 ways to reduce

Bounce Rate क्या है, इसे कम करने के 15 तरीके 

reduce bounce rate  for SEO

क्या आपने Bounce rate के बारे में सुना है? अगर आप पुराने blogger है तो शायद हाँ और अगर नये blogger है तो शायद नहीं भी।

हिन्दी blogging में 90% से ज्यादा लोगों का नाकावयाब होने का कारण होता है कि वो एक ब्लॉग बनाकर 5 - 10 post डालने के बाद पैसा कमाने के जुगाड़ को तलाशने लगते है। उनका Bounce Rate क्या है और इसको कैसे कम कर सकते है इस तरफ ध्यान जाता ही नहीं। 

अक्सर लोग ब्लॉग बनाकर पोस्ट पब्लिश करना, थोड़ा बहुत On page SEO करना इसी को blogging समझते है। अगर थोड़ा ज्यादा मेहनत कर लिया तो post page ranking में भी आ जाता है। अगर इससे भी थोड़ा ज्यादा मेहनत कर लिया तो पोस्ट पर ट्रेफिक भी आ जाता है।

लेकिंग blogging का term यही समाप्त नहीं हो जाता। जब हम google analytic पर अपने ब्लॉग का रिपोर्ट देखते है तो हमें सबसे ऊपर Bounce Rate दिखाई देता है। अगर कभी इसके बारे मे नहीं सुना तो एकबार चकराना स्वाभाविक है कि भला ये क्या चीज है? 

Bounce Rate क्या है  

Bounce Rate SEO का ही एक part है। इससे दो बाते साबित होती है। एक तो आपका अपने website के प्रति कितना अच्छा effort है । 

दूसरा जब कोई visitors आपके website पर visit करता है तो उसका अनुभव कैसा रहा। इस तरह हम कह सकते है कि  bounce rate एक mysterious metrics है जो आपके द्वारा website पर किए गए efforts को मापता है। 

एक visitor का आपके site तक visit करना ही काफी नहीं है। ये भी बहुत मायने रखता है कि वो आपके website पर कितनी देर रुकता है। कितने page पर क्लिक करता है। 

अगर कोई visitor किसी website पर जाकर तुरत वापिस आ जाता है तो इसको bounce माना जाता है। 

by default अगर कोई visitor किसी लिंक के माध्यम से एक पोस्ट को पढ़कर बिना दूसरे page पर गए वापिस हो जाता है तो इसे bounce माना जाता है। 

Google bounce rate को इस तरह define करता है :

" The percentage of single page - visits (i.e, visits in which the person left your site from the entrance page)."

इसका सीधा-सीधा मतलब हुआ visitor किसी website के एक page पर गया और उसी page से website से बाहर निकाल आया। इसके कई कारण हो सकते है। जिसमें एक प्रमुख कारण माना जाता है visitors को वह website किसी कारणवश पसंद न आना। 

लेकिन जरूरी नहीं की एक visitor जब केवल एक page पढ़कर वहीं से वापस हो जाय तो उसको वो website पसंद न आया हो और इसका असर हमेशा negative ही हो। 

मान लीजिये एक visitor हैदराबादी बिरयानी की recipe search कर एक website पर जाता है। वह post को पढ़ने में कुछ वक्त उस साइट पर बिताता है, और फिर उसी पेज से site से बाहर निकाल आता है।  यहाँ bounce गिनती में तो आएगा लेकिन उसके द्वारा बिताए गए वक्त के कारण इस कमी को पूरा कर देगा। 

अब एक दूसरे उदाहरण से को देखें। दूसरा visitor हैदराबादी बिरयानी search करके एक site पर जाता है, वहाँ उसे हैदराबादी बिरयानी की जगह मेरठ की बिरयानी का recipe मिलता है। 

चुकी जो चीज वो व्यक्ति सर्च कर रहा था, उससे अलग चीज मिला जो उसके मतलब का नहीं था। परिणाम स्वरूप विना वक्त बिताए वो visitor साइट से बाहर निकाल आता है। ये पूरा का पूरा bounce है। 

ऐसा क्यों हुआ। यहाँ bounce rate इसलिए create हुआ क्योंकि post में सही keyword का इस्तेमाल नहीं हुआ था, जिस कारण visitor misguide हुआ। 


Bounce Rate count कैसे करते है ? 

इसका बहुत सीधा सा गणित है। मान लीजिये 100 visitors किसी site पर गए, जिसमें से 60 visitors बिना किसी दूसरे पेज पर गये, यानि जिस post पर entry किए थे वहीं से वापिस हो गये तो उस साइट का bounce rate हुआ 60% . 

Bounce Rate कितना होना चाहिए ? 

ऊपर के सारी बातों से इतना तो समझ गये होंगे की किसी site का bounce rate जितना कम होगा उतना ही अच्छा है। 

अब सवाल उठता है क्या सभी तरह के website के लिए bounce rate का मापदंड  एक ही है या industry के हिसाब से अलग - अलग है। 

वैसे आपके website का average bounce rate कितना होना चाहिए ये तो google analytics बता सकता है लेकिन प्रचलित मापदण्डों को माने तो कुछ इस प्रकार है : 

average bounce rate as per industry



Bounce Rate का क्या importance हैं 

अब हम bounce rate को समझने के लिए इतना कुछ कर रहे है, इसकी जरूरत क्या है? एक प्रश्न तो ये बनता है कि जब site पर traffic आना शुरू हो गया, कुछ visitors रुकेंगे, कुछ निकलेंगे, ये सिलसिला तो चलता रहेगा। फिर इस bounce rate कि क्या जरूरत है? 

अगर हम SEMrush  कि माने तो  bounce rate SERPs का 


bounce rate ranking factor in SERPs


यद्यपि search engine journal के अनुसार Google bounce rate को algorithm metrics के तौर पर use नहीं करता। 

तो क्या ये दोनों सहीं है ? बिलकुल सही हैं । कैसे, इसको इस तरह सकझ सकते है। 

Google algorithm bounce rate को सीधे तौर पर metrics मे नहीं लेता लेकिन इसको महत्व जरूर देता है। 

2016 में RankBrain Google algorithm का 3rd most important rank factor था। 

हो सकता है आप RankBrain के बारे में न जानते हो। इसका मुख्य उद्देश्य users के लिए search indent  के माध्यम से search result को improve करना है। 

अगर कोई visitor site पर जाता है और बिना वक्त गवाये वापस आ जाता है तो इसका सिग्नल सीधे तौर पर RankBrain को जाता है कि visitor जिस चीज को खोज रहा था वो उस site पर उपलब्ध नहीं है। 

इसका मतलब ये हुआ साइट पर उपलब्ध contents search result से match नहीं करता। सीधे तौर पर ऐसे साइट को RankBrain search रिज़ल्ट में रोकता है। 


Bounce Rate कम करने के 15 तरीके 

अब तक आप ये तो समझ गये bounce rate क्या है और क्यों bounce rate high होता है। Bounce rate high होने का एक ही कारण होता है visitors का site पर न टिकना। visitors किसी site पर तभी नहीं टिकेंगे जब site उनके मनमाफिक न हो।

अगर सही तरीके से देखे तो ये पूरा का पूरा मामला on-page SEO का है। 

बहुत सारे तरीके है जिससे अपने website को visitors के हिसाब से optimize करके bounce को कम कर सकते है। 

1. Readable contents : 

कोई भी visitor जो किसी site पर visit करता है अपने जरूरत की content के लिए । लेबल अच्छा है लेकिन दवा असरदार न हो तो कौन ऐसे दवा को लेना चाहेगा। 

अक्सर नए और कुछ पुराने ब्लॉगर भी देखकर  site का look तो अच्छा बना देते है लेकिन अच्छा contents कहाँ से लाएँगे। अगर नकल करते है तो Google algorithm इसको पकड़ लेता है। 

अच्छे contents के लिए जरूरी है कि आपको writing skills के साथ विषय पर पकड़ भी अच्छा हो। contents स्वाभाविक और आपकी अपनी होनी चाहिये। 

Contents का अच्छा होने के साथ - साथ जरूरी है कि contents का formatting भी अच्छा हो। 

Font size, font colour, paragraph setting, heading, sub heading जैसे अनेकों ऐसी चीजें है जिनको आकर्षक बनाकर readers के अनुकूल बनाया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि हम blog post formatting को सही से समझें। 


2. Page Load Time: 

ये सबसे basic चीज है जिसपर हमे शुरू से ही ध्यान देना होता है। आप खुद गौर करें, जब किसी site को खोलते है और खुलने में time लेता है तो आप कितनी देर इंतजार करते है। 

आजकल इंतजार करने का किसी के पास समय नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय मानको के हिसाब से आज के समय में किसी भी site को खुलने में एक से दो सेकंड से ज्यादा समय नहीं लगना चाहिये। तीन seconds तक जाते-जाते visitor उस site को छोडकर दूसरे site पर चला जाता है। 

अगर किसी साइट को खुलने में तीन seconds से भी ज्यादा समय लगता है तो उस कंपनी या ब्लॉग को बंद होने के लिए काफी है। 

इसको आप consumer behavior statics से सही से समझ सकते है।  

अगर आपको अपने साइट का speed test करना है तो इसे pingdom speed test tool से कर सकते है। बहुत simple है अपने site का url डाले और test now पर click करें। 

improve  load time to reduce bounce rate

किसी भी website के load time ज्यादा होने के कई कारण हो सकते है। 

⇒ कम से कम plugin का इस्तेमाल : चार के जगह पर एक plugin  से काम चल सकता है तो अच्छा है क्योंकि page पर जितना ज्यादा plugin होगा load time उतना ही ज्यादा होग। 

⇨ Banner ad का सही इस्तेमाल : कुछ लोग ज्यादा लालच में page पर जहां-तहां ad लगा देते है। एक तो इससे page का लोड time बढ़ जाता है  दूसरा readers भी ज्यादा  ad से irritate हो जाता है। एक से दो banner ad का sidebar में इस्तेमाल करे।अगर website नया है तो बेहतर होगा कुछ दिनो तक ad का इस्तेमाल बिलकुल न करे। 

⇨ Image को optimize करे : कुछ लोग image को कहीं से भी copy कर ज्यों का त्यों चिपका देते है जो बिलकुल गलत है। image का seo friendly   बनाना बहुत ही जरूरी होता है। इसके लिए जरूरी है कि  image  का size  ज्यादा बड़ा नहीं होना चाहिए। Image का name और alt text का इस्तेमाल करे।   

⇨ अपने domain registrar को बोले : अपने यहाँ एक कहावत है 
सस्ता रोये बार-बार, महंगा रोये एकबार।" ज्यादा सस्ते के फेर मे न पड़े । आप खुद सोचे जो चीज एक कंपनी पाँच हजार में दे रही है वही चीज   दूसरी कंपनी एक हजार  में कैसे दे सकती है। 

कहीं न कहीं सस्ती कंपनी कुछ चीजों को छुपा रही है जो आपको शुरुआती समय में समझ में नहीं आता, जबतक समझ में आता है देर हो चुकी होती है। ज्यादा सस्ते के चक्कर में न पड़े। 

आपका website भले ही किसी company का न होकर केवल blogging के लिए हो । आप इसे business के तौर पर ले, अगर professional blogging करना चाहते है तो कुछ basic चीजों पर invest करे। यहीं investment आगे चलकर आपको return देगा। 


3. Popup Ad का use न करें  

Readers को post पढ़ते समय बीच-बीच में दिखने वाला ad अक्सर irritate करता है। ज़्यादातर readers popup ad से disturb महसूस करते है। कभी-कभी तो वो इतने खिन्न हो जाते है कि छोडकर चले जाते है और कभी वापस नहीं आते। 

annoying popup increase bounce rate

ऐसा भी नहीं है कि popup से हमेशा घाटा ही होता है। 

Readers का Email कलेक्शन मे ये अहम रोल निभाता है अगर इसको सही तरीके से पेस किया जाय। 

ज़्यादातर साइट owner इससे बचते है क्योंकि फायदा से ज्यादा नुकसान कि गुंजाइस होती है। 

4. Right visitors को target करें 

जब हम नया blog या website बनाते है तो contents डालने के बाद हमारा पहला काम होता है visitors को target करना। 

शुरुआती दौर में हमे ये पता नहीं होता कि हमें किसे और कैसे target करना है। बस एक ही लक्ष्य होता है ज्यादा से ज्यादा ट्रेफिक । इस कोशिश में हम हरेक के सामने अपने site को introduce करते चले जाते है। 

मान लीजिये आपने एक website recipe पर बनाया है और खेल प्रेमी को अपने साइट पर attract कर रहे है। परिणाम क्या होगा? 

एक खेल प्रेमी को recipe में क्या interest.  अगर गलती से site पर आ भी गए तो तुरत वापस हो जाएंगे।  आपके site को फायदे के बदले नुकसान उठाना पड़ेगा । 

5. सही keyword का चुनाव 

कोई भी visitor अपने जरूरत कि चीजें internet पर ढूँढने के लिए keyword का इस्तेमाल करता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि हम अपने post के लिए सही keyword का चुनाव करे। 

ऊपर के एक उदाहरण में मैंने समझाया था कि कैसे एक visitor गलत keyword के कारण हैदराबादी बिरयानी के जगह मेरठ कि बिरयानी के साइट पर चला जाता है। 

चुकी वो site उसके काम नहीं था इसलिए उसका उस साइट से तुरत बाहर आ जाना लाजिमी था । इसलिए bounce rate को कम करने में keyword का भी एक अहम role है। 

6. सही Meta Description लिखना 

बहुत से लोग या तो इसे इग्नोर करते है या ज्यादा seriously नहीं लेते। ये site या ब्लॉग बनाते समय शुरुआती बहुत ही अहम काम है। 

अच्छा meta description भी एक कला है। Meta description कि limit 155 words कि होती है। इतने ही शब्दों में अपने website के बारे में बताना होता है। अब ये आप पर निर्भर करता है कि इतने थोड़े शब्दों में अपने website को कैसे describe करते है। 

Search result में इसका अहम role है। Meta description हमें search result में url के नीचे दिखाई देता है। ज्यादा तर visitors इसी को पढ़कर किसी site पर जाने का निर्णय लेते है। 

अब अगर meta description और site पर उपलब्ध contents मैच न करे तो क्या होगा? Visitors तुरत साइट से बाहर आ जाएंगे परिणाम स्वरूप bounce rete में बढ़ोतरी होगी। 

7. अलग-अलग तरह के contents का प्रयोग करना  

आज के दौर में हर जगह competition है। अपने ग्राहको को लुभाने के लिए लोग पता नहीं क्या-क्या जतन करते है। उसी तरह वो समय गया जब एक website पर केवल लिखित contents हुआ करते थे। 

आज के दौर में visitors कि choice को ध्यान में रखते हुए लोग अपने site पर podcast और video डालने लगे है। इसका परिणाम भी अच्छा है। 

जो बाते आप लिखकर बता रहे हैं  वही बाते अगर video के रूप में दिखा रहे तो इसका परिणाम अच्छा आता है। लोग ज्यादा देर तक टिकते है। 

8.Mobile Friendly site बनाना  

वो जमाना गया जब सारे काम desktop या laptop पर हुआ करते थे। आज के दौर में लोगों के पॉकेट में महंगे मोबाइल होते है। 

आज लोगो के पास इतना समय नहीं कि वो घर या office में बैठकर पोस्ट पढे। 90% से ज्यादा लोग social media का इस्तेमाल मोबाइल के माध्यम से करते है। इसलिए जरूरी है कि आपका साइट mobile friendly हो। 

mobile friendly site reduce bounce rate


इसका मतलब ये हुआ कि आपके साइट को mobile पर खोलकर पढ़ा जा सके। अगर साइट मोबाइल friendly नहीं है तो वो desktop के रूप में खुलेगा और इस परिस्थिति में कुछ पढ़ना बहुत ही मुश्किल होता है। 

आपका site mobile friendly है या नहीं इसको जानने का सबसे अच्छा तरीका ही Google's mobile friendly test tool का प्रयोग कर जानना। 

  • बहुत ही आसान है साइट पर जाकर अपना url डाले और test url पर क्लिक करे। 
  • थोड़ी देर इंतजार करे, processing के बाद कुछ इस तरह का result आएगा :

mobile friendly test for site
 अगर site mobile friendly नहीं है तो result कुछ इस प्रकार आएगा :

mobile friendly text for bounce rate


9. Link के लिए अलग widow को set करें। 

किसी भी साइट पर SEO में Backlink का अहम role है। Bounce rate तो बिना Backlink  के कम हो ही नहीं सकता क्योंकि bounce rate का theory ही यही है कि visitors कम से कम एक दूसरे लिंक पर क्लिक करे। 

ये तभी संभव है जब हम उस page पर मिलते-जुलते विषय से संबन्धित लिंक डाले। 

नए link जोड़ते समय उसको खुलने के लिए हमारे पास दो option होते है। एक तो लिंक उसी window में खुले, दूसरा अलग window में खुले। 

अगर link उसी window में खुलता है तो कई बार readers के लिए समस्या उत्पन्न कर देता है। 

कई बार ऐसा होता है कि नए लिंक खोलने के बावजूद readers को पुराने page पर जाने कि जरूरत महसूस होती है। इस परिस्थिति में उसे page को आगे -पीछे करने में परेशानी महसूस होती है। परिणाम स्वरूप खिन्न होकर उस साइट को हो छोड़ देता है। 

Link को नए window में खुलने का फायदा ये होता है कि readers जितना मर्जी page खोल ले, जब जिसको चाहे पढ़ ले, उसको आगे-पीछे करने कि जरूरत नहीं पड़ती। 


10. Visitors को Call to Action के लिए बाध्य करे। 

call to action reduce bounce rate


आपके call पे visitors site पर आये, जिस काम के लिए आये उसे पूरा किए बिना वापिस चले जाये ये तो गलत बात है। 

आपको हर वो कोशिश करनी है जिससे आने वाला visitors अपने मकसद को पूरा किए वगैर न जाए। अगर वो कोई post पढ़ने के लिए आया है तो उसे पोस्ट पढ़कर जाना चाहिए, अगर कुछ खरीदने आया है तो उसे कुछ खरीदकर ही जाना चाहिए। 

यानि हर तरह से site को visitors friendly बनाना है। 


11. हमेश update करते रहें  

खुद भी update रहें और अपने blog को भी update रखें। आजकल हर कोई नया खोजता है। इसलिए ज्यादा पुराने contents को लोग तवज्जो नहीं देते। Goolge खुद ज्यादा पुराने पोस्ट को अच्छा page ranking नहीं देता । 
ऐसे मे ये सोचना एक बार जो लिख दिया वो lifetime की property हो गई गलत है। कई बार समय के साथ पुराने लिखे गए पोस्ट के संदर्भ बदल  जाते है इसलिए जरूरी है कि उसको समय - समय पर update करते रहें। 

12 Homepage को Smart Look दें

visitors आपके site पर अलग-अलग link के माध्यम से आते है। बहुत से ऐसे होते है जो वहीं से बाहर निकल जाते हैं, कुछ page पर उपलब्ध दूसरे लिंक से बाहर निकलते है। 

लेकिन सबसे ज्यादा visitors home page से बाहर निकलते है। ये research किया हुआ है। 

इसलिए home page जितना स्पष्ट और आकर्षक होगा visitors को एक तरह से पूरे साइट का layout मिल जाता है। 

जिसका परिणाम होता है कई visitors आकर्षित होकर बाहर होने के बजाय दूसरे पोस्ट पढ़ने को मजबूर हो जाते है। 


13. Google Analytics और अन्य Tool का इस्तेमाल करें 

Google Analytics और इसके जैसे कई अन्य tool है जिसको सही से प्रयोग कर readers engagement को बढ़ा सकते है। 

Google Analytics हमे निम्नलिखित बिन्दुओं को समझने में सहायता करता है जैसे:

  • Bounce Rate
  • Time on Site 
  • Traffic Source 
  • Pages per Session 
  • And much more

अन्य tool जैसे HotJar के माध्यम से हम ये जान सकते है कि किसी खाश शेषन के दौरान visitor किस activity में संलग्न था। 

आप इन tools के माध्यम से readers के reaction को जानकार site को उसके according ढाल सकते है। 

14. Attractive Error404 Page लगाएँ 

Error 404 के बारे में आप जरूर जानते होंगे। अगर नहीं जानते हैं तो संक्षिप्त में मै यहाँ बता देता हूँ। 

कई बार ऐसा होता है कि पोस्ट काफी पुराना होने के कारण कई link break हो जाते है अथवा किसी कारणवश हम खुद किसी - किसी पोस्ट को delete कर देते है । 

दोनों परिस्थिति में जब कोई व्यक्ति उस पोस्ट को सर्च करता है तो by default Error 404 दिखाई देता है अथवा लोग "page not found" का massage लगा देते है। परिणाम स्वरूप visitors वही से साइट छोडकर वापस हो जाते है। 

ये तरीका बहुत ही पुराना और बोरिंग हो चुका है। इसके जगह पर हम कोई अच्छा सा स्वागत massage डालकर किसी दूसरे page पर visitors को divert कर सकते है और इस तरह हमारे साइट के bounce rate कम होने के chance बढ़ जाते है। 

15. Frequent होकर लिखें 

बिंदास होकर लिखें। दिल में जो आए लिख दें। बाकी मत रखें। ये सोच न रखे कि ये बात लिखू या न लिखू। 

ये मेरा व्यक्तिगत सोच है। मै व्यक्तिगत रूप से लिखने में कहावतों  का भी प्रयोग करता हूँ, जिसका पोस्ट से कोई लेना-देना नहीं। 

मेरा सोच है कि जब कोई पोस्ट को पढे तो उसे ये न लगे वो पढ़ रहा है। उसे ऐसा लगना चाहिये वो हमसे बात कर कर रहा है। 

अपने पोस्ट के माध्यम से Eye contact बनाने कि कोशिश करे। 

Conclusion  

सही अर्थों में देखा जाय तो bounce rate कम करने के लिए हम वही सारा काम करते है जो हमें SEO करने के लिए किया जाता है। 

आजकल competition का दौर है, हर क्षेत्र में गलाकाट competition है। ऐसे में वैसे ही viewers पाने के लिए बड़े ही पापड़ बेलने पड़ते हैं। उसके बावजूद viewers आकर वापस चला जाय ये तो तौहीन वाली बात होगी। 

इसके लिए जरूरत है कि हम सही से पहले समझे " Bounce Rate क्या है।" इसके लिए एक post को पढ़ लेना काफी नहीं है। इसपर सही से research कि जरूरत है। 

एक बार इस चीज को सही से समझ लेंगे फिर जरूरत इस बात है कि bounce rate को कम कैसे किया जाय। 

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किसी भी तरह के सुझाव अथवा मन में कोई प्रश्न है तो comment जरूर करें।  

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