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Krishna

Saturday, October 10, 2020

asafalta ke teen sutra

 असफलता के तीन प्रमुख कारण 

सफलता और असफलता क्या है? क्या अपने लक्ष्य को न पाना असफलता है? सफलता का पैमाना क्या है? क्या कारण है कि आपका दोस्त तो सफल है जबकि आप असफल? 

Self confidence



आजकल motivational speaker को सुनने और लेख पढ़ने का प्रचलन ज़ोरों पर है। जितने भी लेख पढ़ेंगे हर जगह सफलता के सूत्र मिलेंगे और सफल होने के लिए क्या- क्या करें पढ़ने को मिलेगा। 

असफलता कि बात कोई नहीं करता। सफल लोगों के उदाहरण तो दिये जाते है लेकिन असफल लोगों के उदाहरण नहीं दिये जाते और न ही असफल होने के कारण बताए जाते है।
 
मेरे हिसाब से जितना जरूरी सफलता के रहस्य को समझना है उतना ही जरूरी असफलता के कारणों को समझना भी है। जितना जरूरी आपको ये समझना है कि आपको क्या - क्या करना है उतना ही जरूरी है ये  जानना कि आपको क्या- क्या नहीं करना है। अगर आपको ये समझना जरूरी है कि आपको क्या-क्या करना है तो आपको ये समझना भी जरूरी है  कि आपको क्या -क्या नहीं करना है।
 
वैसे तो बहुत से कारण है जो हमें असफलता कि ओर ले जाते है लेकिन उनमें से तीन प्रमुख कारण हैं जो आमतौर पर अधिकतर लोगों में पाये जाते हैं।
 

अति आत्मविश्वास (Over Confidence)

आत्मविश्वास तो ठीक है, ये होना जरूरी है क्योंकि इसके बिना कुछ नहीं कर सकते। लेकिन अति आत्मविश्वास बिल्कुल ठीक नहीं है। 

अति आत्मविश्वास



एक कहावत आपने जरूर सुनी होगी। Excess everything is bad. कुछ भी अति ठीक नहीं होता। जो दवाई हम बीमारी को ठीक होने के लिए लेते हैं अगर निर्धारित मात्रा से ज्यादा लिया जाए तो फायदे के बदले नुकसान पहुंचाता है। 

यही बात आत्मविश्वास के साथ लागू होती है। आत्मविश्वास अगर अति हो तो पहले तो ये कुछ करने नहीं देती, क्योंकि जैसे ही हम कुछ करना चाहते है बीच में ये अति आत्मविश्वास बाधा खड़ी कर देती है। मन में ये विचार उठने लगते है कि ये काम तो मेरे लिए छोटा है, ये काम मेरे लिए नहीं है, या मुझे कुछ बड़ा काम करना चाहिये। 

ये अति आत्मविश्वास दूसरा काम ये करता है कि आपसे ये गलतियाँ ज्यादा करवाता है। ऐसे लोगों में ये भावना भरी रहती है कि मैं तो सबकुछ कर सकता हूँ। ये भी कर सकता हूँ, वो भी कर सकता हूँ। अगर मेरा दोस्त ये काम कर सकता है तो मैं क्यों नहीं। 

इस विचार को हवा देने का पूरा काम करते है आज के तथाकथित motivator. अगर आपने कुछ motivator को सुना होगा या पढ़ा होगा तो आपको ये जरूर सुनने को मिला होगा कि हर काम इंसान ही करता है। लेकिन आपको ये नहीं बताया जाता कि हर इंसान कि काबिलियत अलग-अलग होती है। 

स्वयं का आकलन (Self Realization)

जबतक  स्वयं का सही से आकलन नहीं करेंगे over confidence के शिकार बने रहेंगे।  असफल होने का बहुत बड़ा कारण है self realization न करना। शायद आपने इसकी जरूरत नहीं समझी अगर जरूरत महसूस हुई तो आपको ये काम करने नहीं दिया गया 

Self realization



जैसा मैंने ऊपर बताया आपके दिमाग में ये कूट-कूट कर भर दिया गया है कि आप सबकुछ कर सकते हैं। अगर कोई दूसरा प्रधान मंत्री बन सकता है तो आप क्यों नहीं। अगर कोई दूसरा scientist बन सकता है तो आप भी बन सकते है। मैं इस theory को सिरे से नकारता हूँ। 

बहुत से लोग विद्यार्थी जीवन से ही राजनीति में लग जाते है क्या सभी प्रधान मंत्री बन जाते हैं। बिज़नस बहुत से लोग करते है लेकिन हर कोई मुकेश अंबानी नहीं बन जाता और न ही हर science पढ़ने वाला अब्दुल कलाम बन जाता है। 

ये सब बताने का मेरा उदेश्य demotivate करने का नहीं है। बस इतना बताना चाहता हूँ कि फुर्सत के क्षणो में बैठकर कभी अकेले में सोचे, आप क्या कर सकते है। इसके लिए किसी दूसरे की सलाह लेने कि जरूरत नहीं हैं। आप स्वयं के बारे में खुद जितना जानते हैं दूसरा नहीं जानता। दूसरा बस अनुमान लगाकर अपना विचार थोप सकता है। 

आप क्या कर सकते है ये कई बातों पर निर्भर करता है। जैसे :

  • आपकी शारीरिक और मानसिक क्षमता
  • आपकी रुचि 
  • आपकी पारिवारिक पृष्टभूमि 
  • आपके परिवार कि आर्थिक स्थिति 
  • आपकी इच्छाशक्ति इत्यादि 

इसको कुछ उदाहरण से समझ सकते हैं:

मान लीजिये आप अपने दोस्त को देखकर फौज कि नौकरी करना चाहते है, लेकिन न तो आपमें देश भावना है और न  ही शारीरिक परिश्रम करने की इच्छाशक्ति, आप खुद सोचें क्या आप फौज कि नौकरी कर सकते है?

एक आदमी politician है और उसे देखकर आप भी politician बनना चाहते है। अब मान लीजिये राजनीति करना न तो आपके पारिवारिक पृष्टभूमि में आता है और न ही आप रैलियों में भाग लेकर पुलिस के डंडे खाना चाहते हैं, फिर आप politician कैसे बन सकते हैं।

आए दिन राजस्थान के कोटा शहर से student के suicide की घटना सुनने को मिलती है। ये शहर देशभर में मेडिकल और Engineering की तैयारी के लिये जाना जाता है। आखिर क्यों ऐसा होता है?

माँ-बाप पैसे के बल पर अपने बच्चों को यहाँ भेजते है डॉक्टर और इंजीनियर बनाने के लिए। बच्चे की इच्छा नहीं पूछते वो क्या करना चाहते है? ये नहीं देखते उनका बच्चा क्या कर सकता है? 

कोचिंग संस्थान अलग pressure में होते है क्योंकि वो मोटी फीस माँ-बाप से ले रखे हैं। वो अपना pressure बच्चों पर डालते है। बच्चे इस pressure को झेल नहीं पाते क्योंकि वो इसके लिए नहीं बने हैं। परिणाम क्या होता है? वही, जो मैंने ऊपर बताया है।  

इसलिए इस विचार को छोड़ दीजिये कि आप सबकुछ कर सकते हैं। दूसरा कर सकता है तो आप भी कर सकते हैं।

ऊपर वाला हर किसी को कोई न कोई एक गुण जरूर देता है। आपको भी दिया है। बस जरूरत है उसे पहचानने की। एकबार उसे पहचान लेंगे आपको खुद पता चल जाएगा आप क्या कर सकते हैं। और ये काम आप खुद कर सकते है self realization से। एक बात गांठ बांध लें, काम कोई छोटा नहीं होता। 

आईआईटी और आईआईएम करने के बाद लोग सब्जी बेच रहे है, कोई चाय बेच रहा है लेकिन अलग अंदाज में। कल तक जिस काम को छोटा समझा जाता था आज एक आदमी ने अपने अलग अंदाज से उसे बड़ा बना दिया। 

उलझन (Confusion)

आपने गोविंदा की फिल्म राजा बाबू जरूर देखा होगी? फिल्म में राजबाबू एक फालतू इंसान के तौर पर होता है जो कुछ नहीं करता है। 

confuse



करिश्मा कपूर को जब वो अपने घर पर लेकर जाता है तो वो देखती है राजाबाबू डॉक्टर के लिबास में होता है। वो पुछती है तुम डॉक्टर हो तो जवाब मिलता है नहीं। उसके बाद राजाबाबू को वकील के लिबास में देखकर कहती है जरूर तुम वकील होगे? जवाब मिलता हैं मैं पाँचवीं में पाँच बार फ़ेल हूँ। 

ऐसे ही हर प्रॉफेश्नल के लिवास में राजाबाबू का फोटो टंगा होता है। क्यों ? वहीं कन्फ़्युशन। ये भी बन जाऊँ, वो भी बन जाऊँ। परिणाम होता है कुछ नहीं बन पाते हैं। पता तब चलता है जब वक्त निकल चुका होता है। 

ऐसा क्यों होता है? क्योंकि आप निर्णय नहीं ले पाते हैं मुझे क्या करना हैं? बस दूसरों को देखकर ख्वाब की ज़िंदगी में जीते हैं। 

 

उपसंहार 

अगर आपको जीवन में सफल होना है तो आत्म निरीक्षण करना पड़ेगा। जबतक आत्म निरीक्षण नहीं करेंगे आपको खुद पता नहीं चलेगा आप क्या कर सकते है? जिसका परिणाम होगा आप कन्फ्युज रहेंगे क्या करे और क्या न करें। वक्त निकाल जाने के बाद हाथ मलना और पछतावे के अलावा कुछ नहीं बचता। इसलिए self realization करे।

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