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Krishna

Sunday, October 11, 2020

Hindustaan ke teen sabse bade motivator

हिंदुस्तान के तीन सबसे बड़े motivator जिन्होंने  इतिहास की दिशा बदल दी। 

आजकल युवाओं में motivator को सुनने और पढ़ने का चलन जोड़ो पर है। यही कारण है कि motivator बनना भी आजकल एक career के समान हो गया है। आजकल के motivator प्रेरणादायक बातें जितनी करते है उससे ज्यादा चुट्कुले सुनाते हैं। यही कारण है कि लोग जाते तो हैं motivator के पास अपनी समस्या लेकर, लेकिन समस्या खत्म होने के बजाय वो एक और समस्या में फस जाते है। 

और वो नयी समस्या है सबकुछ छोडकर हरवक्त motivator को सुनते रहना या motivational article पढ़ते रहना। इसका कारण होता है ऐसे लोगों के contents रोचक कहानियाँ और चुट्कुले से भरे होते है। 

उनको तो आपके रूप में एक reader या viewer मिल गया, लेकिन आपको क्या मिला? आप पहले भी निठल्ले थे अभी भी वैसे ही है। 

आज के समय में सैकड़ों लोग motivator बनकर अपना दुकान चला रहे हैं। दूसरों का भला भले न हुआ हो लेकिन उनका भला जरूर होता है। 

लेकिन क्या आपको पता है इस धरती पर कुछ ऐसे भी motivator हुये जिन्होने इतिहास को ही बदल दिया। अगर ये न हुये होते तो शायद रामायण और महाभारत न लिखी जाती। भारतीय इतिहास में आज हम जो कुछ पढ़ रहे है शायद और कुछ पढ़ने को मिलता। 

आप सोच रहे होंगे मैं किनकी बात कर रहा हूँ। मैं बात कर रहा हूँ जामबंत, भगवान कृष्ण और भारतीय इतिहास के सबसे बड़े कूटनीतिज्ञ चाणक्य के बारे में। 

इनके मोटिवेशन में सबसे बड़ी बात ये थी कि इन्होने उसी को motivate किया जिसको जरूरत थी और उसी वक्त किया जब जरूरत थी। 

अब आप सोच रहे होंगे ये motivator कैसे तो चलिये समझते है इन्होने कब किसको motivate किया और उसका क्या असर पड़ा। 

जामवंत 

भारतीय इतिहास कहें, दर्शन कहें, काव्य कहें या धर्मशास्त्र के चरित्र, मैं जामवंतजी को पहला और सबसे बड़ा motivator मानता हूँ जिन्होने हनुमान को उनके शक्ति से परिचय करवाया और समुद्र लांधने के लिए प्रेरित किया।

motivator जामवंत

Image source Goolge  

अब जरा कल्पना कीजिये उस परिस्थिति का जब जामवंतजी ने हनुमान को उनके शक्ति से परिचय करवाया और समुद्र लांघने के लिए प्रेरित किया। उस वक्त हनुमान के अलावा और भी कई महावली थे जिनको जामवंतजी इस काम के लिए प्रेरित कर सकते थे। 

लेकिन जामवंतजी ने ऐसा नहीं किया और इसके लिए उन्होने कारण भी बताया। जैसे कि उन्होने अपने बारे में बताया कि अब वो बूढ़े हो गए है और उनकी क्षमता इतनी नहीं कि वो इस काम को अंजाम दे सकें। जामवंतजी ने आज के motivator कि तरह अंगद या किसी अन्य योद्धा को ये नहीं कहा कि अगर हनुमान कर सकता है तो तुम क्यों नहीं?

जामवंतजी ये बात बखूबी जानते थे हर व्यक्ति कि अपनी एक क्षमता होती है और हरेक व्यक्ति हर काम को नहीं कर सकता। 

दूसरी बात, जामवंतजी तो शुरू से ही हनुमान के साथ सुग्रीव के मंत्रिमंडल में थे। उन्होने पहले कभी किसी अन्य काम के लिए हनुमान को प्रेरित क्यों नहीं किया? वो चाहते तो पहले भी हनुमान को बाली से लड़ने के लिए प्रेरित कर सकते थे। लेकिन वो जानते थे बाली कि मृत्यु हनुमान के हाथों नहीं होगी। 
हनुमान का समुद्र लांधने के अलावा रामायण में और कोई ऐसा प्रसंग नहीं मिलता जिसमें जामवंतजी ने कभी किसी को motivate किया हो। आखिर ऐसा क्यों? क्योकि इसकी जरूरत नहीं पड़ी। आप कह सकते हैं हनुमान को श्राप था। मैं कहता हूँ श्राप एक  प्रसंग मात्र है। इसके पीछे का तात्पर्य यही है कि जब जरूरत हो तभी किसी को motivate किया जाय। अब जरा एकबार कल्पना करें अगर जामवंतजी ने हनुमान को motivate नहीं किया होता और वो समुद्र लांघने के लिए तैयार नहीं होते तो क्या होता? मै तो कहता हूँ शायद रामायण ही नहीं लिखी जाती। 
 
भगवान श्री कृष्ण 
 जामवंतजी के बाद जो सबसे बड़े motivator हुये हैं वो हैं मेरी नजर में वो हैं भगवान श्री कृष्ण। जरा याद कीजिये महाभारत का वो दृश्य जब कुरुक्षेत्र में युद्ध के लिए सेनाएँ सजी थी और अर्जुन विपक्ष में अपने भाई - बंधुवों को देखकर अपना हथियार गाँडीव रख देते हैं और युद्ध करने से मना कर देते हैं। 

गीता का ज्ञान
Image source google 

अगर वहाँ कृष्ण न होते और गीता का ज्ञान अर्जुन को न दिया होता तो क्या होता? वेदव्यास को न तो गीता और न ही महाभारत लिखने कि नौबत आती और दोनों चीजें हमारे बीच से नदारत होती। 

अगर आपने अभी तक गीता को नहीं पढ़ा हैं तो एकबार जरूर पढ़ें। इसका एक-एक लाइन उस समय जितना प्रशंगिक था आज भी उतना ही है। 

गीता के ज्ञान में कृष्ण ने अर्जुन के एक-एक प्रश्न का उत्तर बड़े ही शांतचित मन से दिया है। अर्जुन के इतना प्रश्न करने के बावजूद कृष्ण एकबार भी विचलित नहीं हुये। कृष्ण ने अर्जुन वो नहीं कहाँ जो अर्जुन सुनना चाहते थे। कृष्ण ने वो कहा जो अर्जुन के लिए जरूरत थी। 

आज के motivator वो नहीं कहते जो आपकी जरूरत है, बल्कि वो कहते हैं जो आप सुनना पसंद करते है। जरूरत हो या न हो बराबर सुनने के लिए प्रेरित करते है। आप इसलिए सुनना पसंद करते है क्योंकि इनके विचारों में चुट्कुले और कहानियाँ ज्यादा होती है जिसे आप सुनना पसंद करते है।  

अर्जुन कृष्ण के मित्र थे। कृष्ण ने आखिर पहले ये ज्ञान अर्जुन को क्यों नहीं दिया। कृष्ण को हम भगवान मानते हैं। कहते हैं वो सबकुछ जानते थे और उन्हीं कि माया से सब हुआ। फिर तो वो ये जरूर जानते होंगे कि युद्ध से पहले अर्जुन हथियार दाल देंगे। फिर पहले ही अर्जुन को ज्ञान देकर क्यों न तैयार कर लिया। सीधी सी बात है कल को बुखार लगेगा इसके लिये आज दबाई नहीं खाएँगे। 

 चाणक्य 

इस कड़ी में मैं अगला नाम बताना चाहूँगा कुटितिज्ञ चाणक्य का। अगर थोड़ी देर के लिए हम जामवंतजी और कृष्ण को काल्पनिक पात्र मान भी लेते है और ये कहकर टाल देते हैं कि ये वास्तविक नहीं बल्कि धर्मशास्त्र कि बातें है तो चाणक्य के बारे में ऐसा नहीं कह सकते। चाणक्य के बारे में पूरा इतिहास मौजूद है। 

motivator चाणक्य
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सब जानते है कैसे चाणक्य ने अपने कूटनीति के बलपर एक साधारण से आदमी को पाटलीपुत्र का राजा बना दिया। वो साधारण सा इंसान था चन्द्रगुप्त, जिसने मौर्य वंश कि स्थापना की। जिसके वंश में आगे चलकर अशोक जैसे राजा हुए जिन्होने अखंड भारत का निर्माण किया। 

चाणक्य ने गुप्त वंश को समाप्त करने के लिए चन्द्रगुप्त को ही क्यों चुना? और भी तो राज्य में बहुत सारे लोग थे। सही बात ये है कि चाणक्य ने चन्द्रगुप्त के अंदर छुपी प्रतिभा को पहचाना। बस उस प्रतिभा को तराशकर उपयोग करने कि जरूरत थी। चाणक्य ने वही किया। 

अब जरा एकबार इस बात कि कल्पना करके देखें कि अगर चाणक्य ने चन्द्रगुप्त को राजा न बनाया होता तो क्या होता? भारत के नक्से कैसे होते और इतिहास पढ़ने में कितना अलग होता। 

चाणक्य चाहते तो शायद खुद भी राजा बन सकते थे लेकिन उन्होने ऐसा नहीं किया। वो एक विश्वविद्यालय के शिक्षक थे। वो ये भली-भांति जानते थे शासन करना आचार्यों का काम नहीं, ये काम किसी क्षत्रिय के लिए ठीक है। 



उपसंहार  

मेरा कहने का सीधा सा मतलब है motivational बातें सुनना और पढ़ना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन कब और कितना? जब जरूरत हो और जितनी जरूरत हो। जब इन चीजों को बिना जरूरत के अपनी आदत बना लेते हैं फिर ये मोटिवेशन नहीं रह जाता बल्कि बाबाजी का प्रवचन हो जाता है। जबतक सुनते है ठीक है जब छोड़ा सब भूल गये। 

आप अपने लिए सबसे बड़े motivator खुद हैं, एकबार प्रयाश करके तो देखिये। दूसरे लोग कहेंगे तुम वो सबकुछ कर सकते हो जो दूसरे कर सकते हैं। मैं कहता हूँ आप वो सबकुछ नहीं कर सकते जो दूसरे भी करते हैं। लेकिन एकबाट सत्य है आप बहुत कुछ कर सकते हैं, बस जरूरत हैं इसबाट को जानने की, आप क्या कर सकते है?

आप क्या कर सकते हैं ये बात भला आपसे बेहतर कौन जान सकता है।   


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